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किसी के बारे में राय बनाने में गुंजाइश रखें

जरूरी नहीं कि वह सब बोल दिया जाए जो आपने सोच लिया है।

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2018, 06:56 AM IST
पं. िवजयशंकर मेहता पं. िवजयशंकर मेहता

किसी के बारे में राय बनाने में गुंजाइश जरूर छोड़िए। जब किसी को लेकर तयशुदा राय बना लेते हैं तो हो सकता है आप गलती कर जाएं। एक इंसान किसी एक स्थिति में थोड़ा अलग होता है, हो सकता है श्रेष्ठ नजर आए औैर वही दूसरे हालात में निकृष्ट हो सकता है। यदि एक स्थिति में उसका मूल्यांकन तय कर दिया तो दूसरी में आप चूक रहे होंगे। जब हम दूसरों के बारे मेंं साफ-सुथरी और स्पष्ट राय बना लेते हैं तो पूर्वग्रह में डूबने की संभावना बढ़ जाती है और पूर्वग्रह से ग्रसित लोग मुंहफट भी हो जाते हैं।

अपनी स्पष्टवादिता को लोग सत्यवादिता मान लेते है। सत्य बोलना और साफ कहने में बारीक अंतर है। अगर आप किसी के बारे में राय बना चुके हैं और जब उससे आपकी बातचीत हो तो शब्दों के स्तर पर सावधान रहने की कोशिश करें। जरूरी नहीं कि वह सब बोल दिया जाए जो आपने सोच लिया है। सीले हुए कपड़ों पर भी प्रेस करना पड़ती है। ऐसे ही अंदर सोचे गए शब्दों को प्रस्तुत करते समय उन्हें साफ-सुथरा और व्यवस्थित करना पड़ता है। आपका बोलना आपके संबंधों की रक्षा भी कर सकता है और हत्या भी।

इसलिए तयशुदा राय बनाने वाले लोग जब अपनी उस राय को शब्दों में तैयाार करें तो थोड़े सावधान हो जाएं। वास्तविक बात अप्रिय ढंग से न करें। यदि कहने का ढंग सही रहा तो आपके संबंध भी बच जाएंगे और जो राय आपने दूसरे के लिए बनाई है उसका फायदा भी उठा सकेंगे।

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पं. िवजयशंकर मेहतापं. िवजयशंकर मेहता
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