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अच्छे लोगों की तलाश हमेशा होनी चाहिए

Bhaskar News | Last Modified - Feb 13, 2018, 06:08 AM IST

अच्छे लोगों की तलाश हमेशा होनी चाहिए
  • अच्छे लोगों की तलाश हमेशा होनी चाहिए
    पं. िवजयशंकर मेहता

    किसी भी बुत को तराशें तो जरूरी नहीं कि वह देवता ही बने। कई बार राक्षस भी बन जाता है। रावण के साथ यही हुआ था। उसे बचपन से ही ऐसा तराशा गया कि जो व्यक्ति देवत्व को उपलब्ध हो सकता था, उसके भीतर राक्षसवृत्ति उतर गई।

    रावण को तराशने का यह काम उसकी मां ने किया था। पिता लगभग तटस्थ हो गए थे पर नाना व मां ने लालन-पालन के दौरान इस प्रकार से तैयार किया कि उसके भीतर की सारी संभावनाएं गलत दिशा में मोड़ दी गईं। ऐसा करने के पीछे उनकी मजबूरी थी कि वे देवताओं से बदला लेना चाहते थे।

    मजबूरियां भी एक तरह का कैदखाना है। बस, फिर वहीं से निकला तो विश्वविजेता बन गया। रावण जानता था कि मेरे आसपास चापलूस लोगों की भीड़ है। इनमें गद्दार भी हो सकते हैं। इसलिए वह वफादारों की तलाश में रहता था। जब उसने अंगद से बातचीत की तो वानरों के लिए उसके मुंह से निकला- ‘हंसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक। जो प्रतिपालइ तासु हित करइ उपाय अनेक।। रावण हंसकर बोला- बंदर में यह एक बड़ा गुण होता है कि जो उसे पालता है उसका वह हर प्रकार से भला करने की चेष्टा करता है। यहां रावण ने वानरों की प्रशंसा कर दी, क्योंकि उसको लगता था ऐसे लोग राम के पास हैं और मेरे पास नहीं हैं। ध्यान रखिए, अच्छे लोगों की तलाश कभी पूरी नहीं होती। रावण के इस प्रसंग से सीखें कि जीवन में सभी तरह के लोग आएंगे, लेकिन कम से कम अच्छे लोगों की तलाश जारी रखें।

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Web Title: Pt Vijayashankar Mehta Talking About Looking For Good People
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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