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कॉर्पोरेट टैक्स घटाएं और निवेशक को कर लाभ दें

आधारभूत ढांचे में सरकारी खर्च बढ़ाकर जॉब पैदा करें

Radhika Gupta | Last Modified - Jan 25, 2018, 05:36 AM IST

  • कॉर्पोरेट टैक्स घटाएं और निवेशक को कर लाभ दें
    राधिका गुप्ता सीईओ, एडलवाइस असेट मैनेजमेंट

    हर नए बजट में 80 सी की लिमिट बढ़ाना म्यूच्युअल फंड इंडस्ट्री में गरमागरम बहस का विषय होता है। अभी तो सिर्फ इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) ही 80 सी के तहत 1,50,000 तक टैक्स लाभ की पात्र हैं। लिमिट को डेढ़ लाख से बढ़ाकर दो लाख करना और 80 सी के तहत स्कीम की संख्या बढ़ाना मेरे ख्याल से आगे का कदम होगा।


    हाल के वर्षों में इक्विटी ने बहुत अच्छे रिटर्न दिए हैं लेकिन, हर कोई जोखिम लेने को तैयार नहीं होता। कई निवेशक अब भी 80 सी के तहत छोटी बचत योजनाओं और एक्स्ड डिपॉजिट में जाएंगे। चूंकि अब दरों में कटौती हुई है तो वे निवेश के अन्य विकल्प तलाश रहे हैं जैसे इक्विटी, जिनके साथ बेहतर रिटर्न की संभावना, तुलनात्मक रूप से कम जोखिम और समान टैक्स लाभ जुड़े होते हैं।


    ऐसे परिदृश्य में निवेशक के लिए उपलब्ध एकमात्र विकल्प है मौजूदा एलएसएस फंड। लेकिन, ये फंड अपनी असेट का बड़ा हिस्सा इक्विटी में लगाते हैं, जिनके कारण वे परम्परागत किस्म के या पहली बार पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए तुलनात्मक रूप से जोखिमभरा विकल्प है। इसकी बजाय इक्विटी और फिक्स्ड इनकम असेट श्रेणियों, दोनों में पैसा लगाने वाले हाईब्रिड फंड्स ऐसे निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प है।


    फिर हाईब्रिड फंड की संरचना कुछ ऐसी होती है कि इक्विटी में मिली प्राप्तियों को कर्ज का संरक्षण दिया जाता है। जब बाजार को फायदा होता है तो इन्हें भी अच्छा रिटर्न मिलता है लेकिन, जब बाजार गिरते हैं तो वे उतनी तेजी से नहीं गिरते। इस तरह वे अच्छे दिनों में हुई प्राप्तियों को संरक्षित रखते हैं। ऐसे में उद्योग जगत को लगता है कि डेब्ट फंड (कर्ज से जुड़ीं बचत योजनाएं) को कुछ टैक्स प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए। टैक्स लाभों का विस्तार डेब्ट स्कीम तक करने से परम्परागत निवेशक भी इसमें भागीदार होने का अवसर हासिल कर सकेंगे। बजट की कुल दृष्टि से और जीएसटी लागू करने के बाद लगता नहीं है कि सरकार आने वाले बजट में अप्रत्यक्ष करों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी। प्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर व्यक्तिगत करों की स्लैब में कुछ रियायत मिल सकती है ताकि शहरों में खर्च करने योग्य आय में इजाफा किया जा सके। लेकिन, वित्तीय दबाव को देखते हुए कॉर्पोरेट टैक्स के मोर्चे पर ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं है। आखिर में, अमेरिका के 401 (के) की तरह लंबी अवधि की सेवानिवृत्ति योजनाओं पर 80सी के तहत आयकर में छूट आगे की दिशा में बड़ा कदम होगा।


    बाजार हमेशा सरकारी खर्च का स्वागत करता है, क्योंकि इससे अार्थिक वृद्धि की दिशा में कई स्तरों पर प्रभाव पड़ता है। जैसे बुनियादी ढांचे में निवेश से जॉब पैदा होंगे, जो खर्च करने योग्य आमदनी बढ़ाएंगे और इस तरह खपत आधारित वृद्धि को बढ़ाएंगे। सरकार ने पहले ही व्यापक फंडिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का संकेत दिया है। लेकिन पीपीपी मॉडल को पुनर्जीवित करना चुनौती है। कॉर्पोरेट इंडिया 34.47 फीसदी की वैधानिक टैक्स दर को कम करने के पक्ष में है। दो साल पहले वित्तमंत्री ने चार साल की अवधि में कॉर्पोरेट टैक्स 25 फीसदी तक लाने की योजना बताई थी लेकिन उसे अब तक लागू नहीं किया गया है। मौजूदा दर तो प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्था से भी अधिक है। कॉर्पोरेट टैक्स रेट में कोई भी कमी का स्वागत ही होगा, क्योंकि निम्न टैक्स रेट से अधिक निवेश को प्रोत्साहन मिलता है और नौकरियां पैदा होती हैं।


    80सी के तहत ईएलसीसी फंड्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टॉक के लिए अलग सब-लिमिट से दीर्घावधी में इक्विटी को बढ़ावा मिलेगा। सरकार को 54 ईसी के फायदों में म्यूचुअल फंड को भी शामिल करने पर विचार करना चाहिए। जब दीर्घावधि की पूंजीगत प्राप्तियां लॉक-इन पीरियड वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश की जाती हैं तो उसके लिए धारा 54 ईसी के फायदे उपलब्ध हैं। पूर्व में म्यूचुअल फंड और इन्फ्रास्ट्रक्चर इक्विटी को भी 54 ईसी के तहत योग्य निवेश की परिभाषा में शामिल किया गया था। इस तरह के कदम निवेशकों को इक्विटी बाजार में निवेश के लिए प्रोत्साहित करेंगे।


    बाजार को मध्यम किस्म की वित्तीय गिरावट की अपेक्षा है। ऐसा इसलिए है कि ऊंचे वित्तीय घाटे से बढ़ती कीमतों और रेट कट की संभावना नहीं रहने जैसे महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ व्यापार घाटे और वित्तीय घाटे का प्रबंधन ही बाजार के भविष्य की दिशा तय करने वाले मुख्य कारक है। संक्षेप में निवेश का वातावरण इस बात पर निर्भर है कि सरकार बजट उपायों से कितनी राहत देती है।

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Web Title: Radhika Gupta Talking About Corporate Tax
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