कर्मचारियों के फर्जी आंकड़ों से पीछा छुड़ाता रेल विभाग / कर्मचारियों के फर्जी आंकड़ों से पीछा छुड़ाता रेल विभाग

Bhaskar News

Feb 20, 2018, 05:16 AM IST

गड़बड़ियों के बारे में जानकारियां छुपा रहे हैं तबसे रेल प्रशासन ने यह व्यवस्था कर दी है।

Railway department gets rid of fake data of employees

अपने कर्मचारियों पर लंबे समय तक यकीन करने के बाद आखिरकार रेलवे ने भी डिजिटल दुनिया और उनके आंकड़ों को ज्यादा विश्वसनीय मानने का फैसला किया है। इसके पीछे रेलवे के कर्मचारियों की हानिकारक चालाकियों हो सकती हैं या आंकड़ों की बढ़ती विश्वसनीयता। किंतु सच्चाई यह है कि जब से रेलवे को पता चला है कि उनके कर्मचारी रेलवे की मशीनों और उपकरणों में होने वाली गड़बड़ियों के बारे में जानकारियां छुपा रहे हैं तबसे रेल प्रशासन ने यह व्यवस्था कर दी है।

अब कोई भी अधिकारी अपने पुराने आंकड़ों का संपादन नहीं कर सकेगा। अब निरंतर नए आंकड़े डाले जाएंगे और वे भी स्वचलित प्रणाली से डाले जाएंगे ताकि ट्रेनों के समय और गति की सही जानकारी रखी जा सके। रेलवे की केंद्रीय नियंत्रण व्यवस्था को यह जानकारी तात्कालिक तौर पर होनी चाहिए कि कहां इंजन खराब हो रहा है, कहां ट्रैक खराब है और ट्रेन किस जोन से किस जोन में प्रवेश कर रही है। रेलवे ने जनवरी के मध्य से यह व्यवस्था शुरू कर दी है और अब कंट्रोल आफिस अप्लीकेशन में मैनुअल तरीके से डाले जाने वाले सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत रह गए हैं। प्रशासन के पास यह शिकायत आ रही थी कि कर्मचारी ज्यादा दक्षता का प्रदर्शन करने के लिए तमाम अक्षमताओं को छुपा रहे हैं।

मौजूदा व्यवस्था इस बात का संकेत है कि आरंभ में कर्मचारियों पर अतिरिक्त विश्वास जताने वाले रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी को कहीं निराश होना पड़ा है। उन्होंने शुरू में यह भी कहा था कि प्रौद्योगिकी तभी भरोसे के साथ चल सकती है जब हमारे कर्मचारी भरोसे के होंगे। रेलवे जैसे बड़े संगठन में कर्मचारियों के प्रति जगाया गया यह शुरुआती विश्वास जहां उत्साहवर्धक था वहीं फर्जी आंकड़े भरने और उनसे अधिकार लेकर मशीनों का जिम्मा सौंपा जाना कहीं निराश भी करता है। यह भारतीय कार्यशैली और उसकी दक्षता पर एक टिप्पणी भी है। हमारे प्रधानमंत्री ने हाल में डेवोस में डाटा को सबसे महत्वपूर्ण और ताकतवर वस्तु बताया था। ऐसे में रेलवे का यह परिवर्तन स्वागत योग्य है लेकिन इसी को आधार बनाकर कर्मचारियों में सुधार की भी आवश्यकता बनती है। आशा है विवेकानंद और गीता में भरोसा करने वाले लोहानी जी मनुष्य की बुनियादी ईमानदारी में विश्वास बनाए रखेंगे।

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