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रोगियों को दवा कंपनियों की प्रयोगशाला बनने से बचाएं

सकारात्मक परिणाम तो प्रचारित किए जाते हैं परंतु नकारात्मक दुष्परिणाम की जानकारियों को सामने नहीं आने दिया जाता।

rishabhdeo pandey | Last Modified - Dec 22, 2017, 05:09 AM IST

  • रोगियों को दवा कंपनियों की प्रयोगशाला बनने से बचाएं
    ऋषभदेव पांडेय, सहायक प्राध्यापक

    भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दवा कंपनियों व संगठनों के लिए क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़े सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया है। ऐसे ट्रायल के लिए पंजीकृत कंपनियों व संगठनों को ट्रायल की सभी जानकारियां एक साल के भीतर सबके सामने रखनी होंगी। दुनिया में क्लीनिकल ट्रॉयल वर्षों से बहस का गंभीर मुद्‌दा बना हुआ है। ऐसी गतिविधियों के सकारात्मक परिणाम तो प्रचारित किए जाते हैं परंतु नकारात्मक दुष्परिणाम की जानकारियों को सामने नहीं आने दिया जाता।


    एक आंकड़े के अनुसार दुनिया में 60 प्रतिशत क्लीनिकल ट्रायल गुप्त रूप से किए जाते हैं। कुछ संस्थान कार्य पूरा करने के बाद पंजीकरण करवाते हैं। भारत में क्लीनिकल ट्रायल पंजीकृत करने वाली संस्था क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया (सीटीआरआई) के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 30 जून तक करीब 9000 क्लीनिकल ट्रॉयल पंजीकृत किए गए थे। चिंता इस बात की है कि इनमें से 5604 पंजीयन ट्रायल शुरू होने अथवा पूर्ण होने के बाद करवाए गए हैं। क्लिनिकल ट्रायल के लिए व्यक्ति अथवा मरीज की सहमति अनिवार्य है। परंतु रिपोर्ट्स के अनुसार देश के कई राज्यों में गांव के गांव को नहीं पता होता कि उन पर दवाई के असर देखने वाला प्रयोग किया जा रहा है।

    इस विषय पर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। इसमें सरकार को ऐसी व्यवस्था करने को कहा गया था कि रोगी की सहमति के बाद ही क्लीनिकल ट्रॉयल किए जाने की अनुमति दी जाए। साथ ही प्रभावितों को मुआवजा देने की प्रणाली विकसित करने को कहा गया था। किंतु उक्त दिशा-निर्देशों का पालन होता हुआ नहीं दिखाई देता। सरकार को चाहिए कि उक्त दिशा-निर्देशों का दृढ़ता से पालन करते हुए क्लीनिकल ट्रायल के नियमन के लिए ठोस कदम उठाए। अवैध क्लीनिकल ट्रायल में लिप्त लोगों व सहयोगी चिकित्सकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी होगी ताकि आम मरीजों के शरीर को दवा कंपनियों की प्रयोगशाला बनने से बचाया जा सके।

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Web Title: Rishabhdeo Pandey Talking About Pharmaceutical Companies
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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