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क्राउडफंडिंग पर नीति बनाकर स्टार्टअप को बढ़ावा दें

मोबाइल फोन के सबस्काइबर बेस के साथ भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल मार्केट में से है, जिसका दोहन किया जाना है।

Sidharth sachdev | Last Modified - Dec 16, 2017, 07:14 AM IST

क्राउडफंडिंग पर नीति बनाकर स्टार्टअप को बढ़ावा दें

किसी नए उपक्रम के लिए बहुत सारे लोगों से छोटी-छोटी राशि इकट्ठा करके फंड जुटाने को क्राउडफंडिंग कहते हैं और भारत में लोगों का ध्यान इस पर जा रहा है। कई सोशल स्टार्टअप ने इसी रास्ते से अपना वज़ूद बनाया है। फेसबुक के सर्वाधिक यूज़र और चीन के बाद सबसे अधिक मोबाइल फोन के सबस्काइबर बेस के साथ भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल मार्केट में से है, जिसका दोहन किया जाना है। इन तथ्यों का महत्व है, क्योंकि वर्ल्ड बैंक के मुताबिक क्राउडफंडिंग के बढ़ने के लिए यदि कोई एकमात्र तथ्य जिम्मेदार है तो वह है सोशल मीडिया में पैठ।


क्राउडफंडिंग एक लोकतांत्रिकृत फंडिंग है। जहां तक संपूर्ण इंटरनेट इकोनॉमी का सवाल है, क्राउंडफंडिंग उसका छोटा-सा हिस्सा भर है लेकिन, यह बहुत बड़ा प्लेटफॉर्म और ऐसे लोगों के लिए फंड इकट्ठा करने का अच्छा मौका है, जो परम्परागत स्रोतों से इसे इकट्ठा नहीं कर पाते। कई बार तो उन्हें इतनी छोटी राशि की जरूरत होती है कि बैंक लोन नहीं दे सकती। एेसे में क्राउडफंडिंग तेजी से से और किफायती समाधान देती है। क्राउडफंडिंग को चार प्रकारों में बांटा जा सकता है : किसी बिज़नेस को शुरू करने के लिए सीड फंडिंग, जो आइडिया वजूद में है उसके विस्तार के लिए इक्विटी फंडिंग के लिए, सदस्यों के बीच लोन देने के लिए क्राउड लेंडिंग और डोनेशन। ज्यादा वक्त नहीं लगेगा जब हमें क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म पर ठोस नीति और इन पर निगाह रखने के लिए रेग्युलेटर की जरूरत होगी।


एक देश के रूप में हमें चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे अन्य विकासशील देशों के बीच अंतर पाटना होगा, क्यों ग्लोबल आंत्रप्रेन्योरशिप मॉनिटर पर हम इनमें अंतिम चौथे स्थान पर हैं। उचित कानूनी व्यवस्था के साथ ऐसी पहल हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है। हम चीन से सबक ले सकते हैं, जहां हाल के वर्षों में बिज़नेस के अनुकूल वातावरण और फंडिंग तक आसान पहुंच के कारण टेनसेंट, अलीबाबा, बाइदू और शिआओमी मार्केट कैपिटलाइजेशन के संदर्भ में बहुत बड़ी कंपनियां बन गई हैं।

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Web Title: kraaudfndinga par niti banakar staartap ko bढ़aavaa den
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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