ज्ञान का रास्ता छोड़कर आतंक अपनाया है तो सख्ती जरूरी / ज्ञान का रास्ता छोड़कर आतंक अपनाया है तो सख्ती जरूरी

bhaskar news

Jan 10, 2018, 05:03 AM IST

दीर्घकालिक तौर पर उन संस्थाओं की निगरानी की आवश्यकता है जहां ऐसा हो रहा है।

talking about Aligarh Muslim University student

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान के शोध छात्र मन्नान वानी ने अगर ज्ञान का रास्ता छोड़कर आतंकवाद का रास्ता अख्तियार किया है तो इस बारे में न सिर्फ तात्कालिक कठोर कार्रवाई की जरूरत है बल्कि दीर्घकालिक तौर पर उन संस्थाओं की निगरानी की आवश्यकता है जहां ऐसा हो रहा है।

विज्ञान के छात्र होने के कारण वानी की सोच में एक वैज्ञानिक दृष्टि होनी चाहिए जो किसी प्रकार के भावनात्मक अतिरेक में बहने से रोकती है। इसके बावजूद अगर वानी अपना शोध पूरा नहीं कर रहा है और घर लौटने की बजाय हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठन की पनाह में जा रहा है तो यह चिंता की बात है। कश्मीर में अगर बुरहान वानी जैसे आतंकी रहे हैं तो शाह फैजल जैसे युवा आईएएस अधिकारी भी हैं, जिन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा को श्रेष्ठता के साथ उत्तीर्ण किया था और अफशां आशिक जैसी लड़कियां भी हैं जिन्होंने पत्थर फेंकना छोड़कर फुटबॉल की टीम का नेतृत्व करना स्वीकार किया। फैजल और अफशां के विपरीत अगर वानी जैसे भूगर्भ विज्ञानी धरती का सीना छेदकर रत्न निकालने की बजाय आंतक का रास्ता अपनाते हैं तो इसे वानी के व्यक्तिगत स्वभाव के अलावा एएमयू के परिवेश से भी जोड़कर देखना चाहिए। एएमयू में अल्पसंख्यक समुदाय के बहुसंख्यक छात्र हैं और उसके बारे में यह नहीं कहा जा सकता कि वहां वानी को उसके जन्मस्थान या धर्म के नाम पर उत्पीड़ित किया गया होगा।

वानी की इस राह पीछे जरूर जेहादी प्रेरणा रही होगी जो परिवार की जिम्मेदारी और निजी सपने पर भारी पड़ी है। इसी पहेली पर एक बार शाह फैजल ने लिखा भी था कि जिस तरह से अपनी पढ़ाई-लिखाई और कॅरिअर का लालच छोड़कर नौजवान पथराव कर रहे हैं और बंदूक उठा रहे हैं उससे लगता है कि मुख्यधारा से बड़ा कोई आकर्षण है। सरकार का दावा है कि विमुद्रीकरण के बाद पथराव तो ठहर ही गया है और आतंकी हमलों में कमी भी आई है। पहली बात तो सही है लेकिन, दूसरी बात से सहमत होना कठिन है। मन्नान वानी की घटना सरकार की उन योजनाओं पर भी सवाल खड़ा करती है जो वह कश्मीरी युवाओं के लिए देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में चला रही है। हिजबुल मुजाहिदीन ने चाहे यह कहा है कि वानी उसके गुट में शामिल हो गया है पर यदि यह सही है तो फिर आतंकवाद से जुड़ी घटना है और उस पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

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