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कश्मीर समस्या को चौतरफा रणनीति से हल करना जरूरी

कश्मीरी नेताओं की सहानुभुति पाकिस्तान के साथ है।

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2018, 08:15 AM IST
talking about jammu and kashmir issue

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने जम्मू से घाटी तक सुरक्षा बलों के ठिकानों पर हमला करके न सिर्फ सुरक्षाकर्मियों बल्कि नागरिकों को भी क्षति पहुंचाई है। अफजल गुरु की फांसी के दिन नौ फरवरी को हमले की आशंका थी और खुफिया विभाग ने इस तरह की रपट दी थी। सेना और अर्द्धसैनिक बलों ने उन रपटों के हवाले से चौकसी भी की थी लेकिन आखिरकार रविवार शाम जम्मू के सुजवान स्थित सेना के शिविर पर हमला हो गया और पांच जवान शहीद हो गए।

विडंबना देखिए कि उस हमले के दूसरे ही दिन सोमवार को श्रीनगर के करणनगर में केंद्रीय अर्द्धसुरक्षा बल के कैंप पर हमला हुआ और वहां भी एक जवान शहीद हुआ। सेना और सुरक्षा बल लगातार इन हमलों का मुकाबला कर रहे हैं, इस बारे में किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद अगर आतंकी अपनी गतिविधियों में कामयाब हो रहे हैं तो जाहिर है कि स्थानीय आबादी में उनकी पैठ है। हाल में नावीद नामक आतंकी के श्रीनगर जेल से भाग निकलने की घटना इसका प्रमाण है। वह 2016 में पकड़ा गया था और जैसे-तैसे कश्मीर में ही बना हुआ था।

अगर कश्मीर में पकड़े गए सारे आतंकियों को राज्य से बाहर रखा जाता है और फिर भी नावीद वहां रहने में सफल हो गया तो इसका मतलब है कि कहीं कुछ गड़बड़ है। हमारी जासूसी संस्थाएं तो सक्रिय हैं और वे यह बता देती हैं कि कब हमला होने वाला है। इस बारे में कश्मीर में काम कर रही महबूबा मुफ्ती की मौजूदा सरकार को जिम्मेदारी से पूरी तरह बरी नहीं किया जा सकता।

कश्मीरी नेताओं की सहानुभुति पाकिस्तान के साथ है। इसकी झलक हाल में विधानसभा में नेशनल कांफ्रेंस के विधायक की तरफ से पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने में भी दिखाई पड़ी। यह कमियां हैं और इनके साथ एनडीए सरकार कश्मीर को संभाल रही है। यहां कांग्रेस नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की उस आलोचना को नजरंदाज नहीं किया जा सकता कि मौजूदा सरकार के आने के साथ सीमा पर युद्धविराम के उल्लंघन और राज्य के भीतरी हिस्सों में भी हमले बढ़े हैं। कश्मीर समस्या के लंबे दौर में यह उतार चढ़ाव आते रहते हैं इसके बावजूद इस सरकार ने जो दावे किए थे वह पूरे नहीं हो रहे हैं। इसलिए कश्मीर समस्या को चौतरफा रणनीति के माध्यम से हल करने के लिए ठोस कदम उठाने ही होंगे।

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