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ईश्वर पर विश्वास रखें, अहंकार से बचेंगे

अच्छे लोगों को अपनी अच्छाई का अहंकार न हो इसके लिए बहुत सावधानी रखनी होगी।

Danik Bhaskar | Jan 25, 2018, 05:29 AM IST
पं. िवजयशंकर मेहता पं. िवजयशंकर मेहता

अहंकार खुद के लिए खुद के द्वारा किया गया षड्यंत्र है। जब मनुष्य के भीतर अहंकार उतरता है तो वह दो काम करता है- दूसरों पर हावी होने की कोशिश और दूसरा काम, खुद को भटकाने की तैयारी। अहंकारी मनुष्य दूसरों से जुड़ने के बाद यह भूल जाता है कि उसका अहंकार उसे भटका रहा है। उसे लगने लगता है मैं जो भी कर रहा हूं, सही कर रहा हूं। अहंकार का भोजन है अति सम्मान की चाहत। मेरे कहे शब्दों को खूब मान मिले, मैं जहां खड़ा हो जाऊं, लोगों में अलग पहचान हो, मेरे शब्द आदेश बन जाएं। इसीलिए अहंकारी को जब सीधे-सीधे कुछ नहीं मिलता तो वह छीनने लगता है।

यह इतना सूक्ष्म होता है कि बुरे और भले दोनों प्रकार के लोगों में एक साथ उतर जाता है। बुरे लोगों में उतरता है तो वे गलत काम करने लगते हैं और जब अच्छों में उतरता है तो वो गलत काम भले ही कम करें, पर खुद को अधिक परेशान करनेे लगते हैं। अहंकार के चलते बुरा आदमी अशांत हो तो समझ में आता है कि इसे सजा मिल रही है, पर भला आदमी केवल अहंकार के कारण खुद को अशांति की सजा दे यह ठीक नहीं। अच्छे लोगों को अपनी अच्छाई का अहंकार न हो इसके लिए बहुत सावधानी रखनी होगी।

अहंकार से बचने का एक सीधा तरीका है, अपने से ऊपर परमशक्ति पर विश्वास। इतना जरूर मानिए कि जो भी हमें मिल रहा है या हम चाह रहे हैं, देने वाला वह परमात्मा है। यहीं से अहंकार पर नियंत्रण होगा और आप अच्छे काम करते हुए शांत बने रहेंगे।