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गृहस्थी बसाने व संवारने के अवसर न चूकें

वैवाहिक जीवन में जो तनाव आता है, यदि उसको ठीक से समझ लें तो इससे अधिक आनंद और किसी जीवन में नहीं है।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 05:53 AM IST

सभी धर्मों ने गृहस्थी को श्रेष्ठ माना है। जिस धर्म ने जिस भी परमशक्ति पर विश्वास किया है उस शक्ति को स्त्री-पुरुष के दांपत्य में उतरने में अतिरिक्त रुचि है। अब तो धीरे-धीरे सभी मानने लगे हैं कि वैवाहिक जीवन में जो तनाव आता है, यदि उसको ठीक से समझ लें तो इससे अधिक आनंद और किसी जीवन में नहीं है।

यह तनाव भी इसलिए आता है कि स्त्री-पुरुष लंबे समय तक अलग-अलग जीवन बिताने के बाद पति-पत्नी बनतेे हैं। तो अलग-अलग बिताए गए पिछले 20-24 साल की समझ कहीं न कहीं टकराएगी ही। यह स्वाभाविक है इसलिए इसे तनाव के रूप में न लें तो यही गृहस्थी जीवन में आनंद बरसा देगी। दांपत्य जीवन का सबसे बड़ा फायदा होता है के आप पर नियमित और व्यवस्थित रहने का दबाव आता है, खान-पान में नियंत्रण हो जाता है और वासनाएं अनुशासित हो जाती हैं। अविवाहित जीवन में मनुष्य के उन्मुक्त होने के खतरे बने रहते हैं। लेकिन कुछ लोग वैवाहिक जीवन में भी उसकी मर्यादाओं को स्वीकार न करते हुए उन्मुक्त रहना चाहते हैं।

ऐसा करके तो वे लगभग पाप के रास्ते पर ही चल रहे होंगे। आत्मीयता क्या होती है, विवाह के बाद यह मनुष्य को बहुत अच्छे से समझ में आने लगता है, क्योंकि आज के पति-पत्नी को भविष्य के माता-पिता बनना है। रिश्तों की समझ, समय का सदुपयोग, एक-दूसरे के लिए जीने की तमन्ना ये सब किसी और जीवन में शायद देखने को न मिले। इसलिए गृहस्थी बसाने के अवसर चूकें नहीं और जब बस जाए तो उसको सवांरने में कोई भूल न करें।