Hindi News »Abhivyakti »Jeene Ki Rah» Vijaya Shankar Mehta Talkin About Freedom

संवेदनशील होना है तो स्वतंत्र रहें

जि़ंदगी में ज्यादातर कोशिश अपने आपको स्वतंत्र रखने की होती है।

vijayshankar mehta | Last Modified - Dec 27, 2017, 01:43 AM IST

  • संवेदनशील होना है तो स्वतंत्र रहें
    पं. विजयशंकर मेहता

    स्वतंत्रता सबको पसंद है। कोई भी परतंत्र रहना नहीं चाहता। जि़ंदगी में ज्यादातर कोशिश अपने आपको स्वतंत्र रखने की होती है। फिर आदमी अगला कदम उठाता है दूसरों को परतंत्र करने के लिए। दूसरे को गुलाम बनाने के चक्कर में वह यह भूल जाता है कि खुद को खुद ही की कुछ आदतों से परतंत्र बना रहा होता है। खाने-पीने के मामले में हम स्वतंत्र हैं। जो इच्छा हो खा लेते हैं, पी लेते हैं। परंतु दो गतिविधियों में आज का इंसान दूसरों पर निर्भर होकर परतंत्र हो गया है। अपनी इच्छा से वह न तो रो सकता है, न ही मुस्कुरा सकता है। रूदन और मुस्कान दूसरों से प्रभावित होती जा रही है।

    जब आंसू आते हैं तो मन में यह आवाज उठती है कि ये बहेंगे तो लोग क्या कहेंगे? ऐसे ही यदि मुस्कुराना हो तो हिसाब लगाते हैं कि कहीं हमारे मुस्कुराने का कोई फायदा न उठा ले। आजकल इन दोनों ही कामों में लोग दूसरों को फ्रेम करते हैं। आदमी कम से कम इतना तो स्वतंत्र हों कि ये काम मर्जी से कर सकें। आंसू और मुस्कान संवेदना के क्षणों में प्रकट हो रहे हों तो इन्हें बिलकुल न रोकें।

    जीवन में जब संवेदना उतरती है तो आंखों से आंसू बनकर निकलती है और होंठों से मुस्कान के रूप में झरती है। संवेदना के समय आंख और होठ से आने के पहले आंसू और मुस्कान पूरे शरीर के रोम-रोम से गुजरते हैं। यही संवेदना की विशेषता है। यदि आपको संवेदनशील होना है तो स्वतंत्र रहें। दूसरे क्या कहेंगे या क्या सोचेंगे इसे छोड़ अपनी मस्ती कायम रखिए।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Vijaya Shankar Mehta Talkin About Freedom
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Jeene Ki Rah

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×