जीने की राह

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अपने भीतर उतरिए, खुद को जान जाएंगे

नई पीढ़ी के बच्चे इस बात को लेकर भ्रम में पड़ जाते हैं कि अपने को जानना होता क्या है।

Dainik Bhaskar

Feb 07, 2018, 06:07 AM IST
पं. िवजयशंकर मेहता पं. िवजयशंकर मेहता

‘अपने आपको जानिए’ ऐसा सालों से कहा जा रहा है। नई पीढ़ी के बच्चे इस बात को लेकर भ्रम में पड़ जाते हैं कि अपने को जानना होता क्या है। उनके लिए तो नाम, वंश, पद और शरीर ही पहचान है। अपने आपको जानने की कोशिश तब करें जब शांति की तलाश हो। कहीं जाना नहीं है। बस, शांति से अपने भीतर उतरना और यह मानकर चलना कि भीतर से आप चार बातों से बनें हैं- शरीर, मन, हृदय और आत्मा।

ये टुकड़े हो जाने के बाद आपको धीरे-धीरे समझ में आने लगेगा। इस क्रिया की शुरुआत देखने से की जाए। अगर ईमानदारी से अपने भीतर देखने लगेंगे तो यह क्रियामात्र होगी, परिणाम नहीं मिलेगा। हो सकता हैै आप जो देख रहे हों वह गलत भी हो, पर देखिए। देखने का अगला परिणाम होगा अनुभव। कुछ अनुभूति होने लगेगी और जैसे-जैसे आप मन, हृदय और उससे आगे बढ़ेंगे, आत्मा पर पहुंचना मिलेगा। वहां साफ दिखने लगेगा कि जो आप देख रहे थे वह सही था या गलत। शरीर में हमारी सांस त्वचा के नीचे रहती है इसलिए सबसे पहले शरीर पर मालिश करते हुए महसूस कीजिए कि आप भीतर की सांस देख रहे हैं।

जैसे ही सांस में जाएंगे, वहां मन मिलेगा, मन में विचार मिल जाएंगे। विचार देख लिए और उनको शून्य करना शुरू किया तो छलांग लग जाएगी आत्मा की। बहुत सरल तरीका है। करके देखिए, जो भी परिणाम आएगा वह आपका निजी होगा। शायद दूसरों से शेयर नहीं कर पाएं पर स्वयं के लिए बड़े काम का होगा।

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पं. िवजयशंकर मेहतापं. िवजयशंकर मेहता
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