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ईश्वर की शक्ति को साथ रख बंटवारा करें

मामला उत्तराधिकार का हो, मुआवजा देने का हो या जिसका भी हो, बंटवारा करते समय आप दांव पर लगे होते हैं।

Danik Bhaskar | Jan 17, 2018, 04:34 AM IST
पं. िवजयशंकर मेहता पं. िवजयशंकर मेहता

बंटवारा एक बहुत बड़ी चुनौती है। हम सबके जीवन में कभी न कभी ऐसा अवसर आता है कि बंटवारा करना पड़ता है। यह काम का हो सकता है, जायदाद हो सकती है या कभी कोई पुरस्कार देते समय ऐसा निर्णय लेना पड़ सकता है। आजकल की जीवनशैली में तो प्रेम का भी बंटवारा करना पड़ता है। मामला उत्तराधिकार का हो, मुआवजा देने का हो या जिसका भी हो, बंटवारा करते समय आप दांव पर लगे होते हैं।

यदि बंटवारे के सारे निर्णय आपके अधिकार में हैं तो सबसे बड़ी चुनौती यह बन जाती है कि जिनके बीच बंटवारा किया जा रहा है उनका नुकसान भी न हो और वो संतुष्ट भी हों। ये दोनों काम बहुत कठिन हैं, पर जब कभी करना पड़ जाए तो पीछे न हटें, घबराएं नहीं और तीसरी बात व्यवस्था के साथ होमवर्क करें। वरना निर्णय गलत भी हो सकता है। बंटवारा केवल एक प्रक्रिया नहीं है। इसमें बड़ी गहराई में जाकर भविष्य देखना पड़ेगा और यह मानकर चलिए कि जिनके बीच भी बंटवारा कर रहे हैं, कोई न कोई असंतुष्ट जरूर रहेगा। परंतु आप अपने निर्णय के प्रति असंतुष्ट न रहें।

जब कभी भी बंटवारा करना हो, अपने साथ परमात्मा की शक्ति को जरूर रखिए। यह शक्ति आपको तो सद्‌विचार देगी ही, सामने वालों के मन में भी आपके निर्णय के प्रति सद्‌भाव पैदा कर देगी। यह अंधविश्वास का नहीं, आत्मविश्वास का मामला है। वरना जिस शांति के लिए आप बंटवारा कर रहे हैं वह कलह में भी बदल सकती है।