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आने वाले समय का मान करने का अवसर

vijayshankar mehta | Last Modified - Dec 30, 2017, 07:57 AM IST

सफलता का अहंकार और असफलता का अवसाद दोनों जीवन के लिए ठीक नहीं है।
  • आने वाले समय का मान करने का अवसर
    पं. विजयशंकर मेहता

    सफलता प्राप्त करना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। आप किसी भी क्षेत्र में हों, प्रयास ऐसे किए जाएं कि सफलता अवश्य अर्जित हो। लेकिन, जब जीवन के हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा है, यदि किसी कारण से सफल नहीं हो सकें तो उदास भी न हों। सफलता का अहंकार और असफलता का अवसाद दोनों जीवन के लिए ठीक नहीं है।

    सफलता की जितनी कहानियां कही जाती हैं उनमें से एक अत्यधिक लोकप्रिय रामचरितमानस का सुंदर कांड है। इसमें तुलसीदासजी ने हनुमानजी की सफलता की कथा बताई है। जब हनुमानजी सफल होते हैं तो सफलता के साथ क्या किया जाए, यह भी सिखाते हुए एक बड़ा संदेश दे जाते हैं कि मन, वचन और कर्म में एक रहें। यहां हम लोग भेद कर जाते हैं। सोचते कुछ, बोलते कुछ और करते कुछ और हैं। इसी बात को समझने और वातावरण में पॉजिटीव एनर्जी फैले इसके लिए नववर्ष की पूर्व संध्या (31 दिसंबर की शाम) पर एक विशेष कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के प्रमुख नगर भिलाई में किया जा रहा है।

    देश-दुनिया में सवा करोड़ लोग एक साथ, एक ही समय हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इसका सीधा प्रसारण रात 7 से 8:30 बजे तक संस्कार टीवी पर किया जाएगा। आप दुनिया के किसी भी कोने में रहें, कल शाम डेढ़ घंटे का समय निकालकर इस अनूठे आयोजन से स्वयं जुड़िए, अपने बच्चों को भी जोड़िए। आप बहुत अच्छे ढंग से बीते की विदाई और आने वाले समय का मान कर रहे होंगे। फिर देखिए, जो सम्मान आपने समय का किया होगा, समय उसे दोगुना-चौगुना अधिक करके आपको लौटाएगा।

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Web Title: Vijayshankar Mehta Talking About Success And Failure
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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