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शिक्षा में अंधानुकरण ही करेंगे या मौलिकता भी लाएंगे

मोदी सरकार का आधे से ज्यादा कार्यकाल गुजरने पर कई वादे पूरे होने की चर्चा हो रही है लेकिन, नई शिक्षा नीति लाना है।

Dainik Bhaskar

Nov 30, 2017, 05:44 AM IST
article by mahipal chaudhary on education

केंद्र में मोदी सरकार का आधे से ज्यादा कार्यकाल गुजरने पर कई वादे पूरे होने की चर्चा हो रही है लेकिन, नई शिक्षा नीति लाने के वादे पर कोई बोल नहीं रहा है। आज यदि कोई देश महाशक्ति बनना चाहता है तो ऐसा ज्ञान के जरिये ही संभव है। समझा जा सकता है कि इस दिशा में नई शिक्षा नीति का कितना महत्व है। सवाल उठता है कि नई शिक्षा नीति में क्या हो? क्या हम फिर पश्चिम का अंधानुकरण करेंगे या अपना कुछ मौलिक भी लाएंगे।


1918 में वैश्विक स्तर पर पाठ्यक्रम संबंधी पहली किताब ‘द करिकूलम’ में जॉन फ्रेंकलिन बोबेट ने लिखा की पाठ्यक्रम में उन बातों का उल्लेख हो, जिससे विधार्थी समाज में अपने कौशल का प्रदर्शन कर सकें और अपने देश के इतिहास, संस्कृति तथा साहित्य के बारे में जान सके। परंतु वैश्विकता के इस दौर में बाजार और प्रतिस्पर्द्धा ने शिक्षा जगत को काफी हद तक प्रभावित किया है। आज शिक्षाविद 21वीं सदी के कौशल पाठ्यक्रम में ला रहे हैंं, नवीनतम टेक्नोलॉजी ला रहे हैं और ऐसे विद्यार्थी गढ़ने में लगे हैं, जो वैश्विक स्तर पर स्पर्द्धा कर सकें। लेकिन यह सब करते हुए हम वैश्विक मॉडल के बंदी बन गए हैं, जो अचीवमेंट आधारित परीक्षण पर आधारित है। लेकिन, जितनी उपलब्धियों की बात होती है, उतना नाकामी का भय गहराने लगता है। सफलता की तीव्र आकांक्षा सफलता की गारंटी के लिए संघर्ष की ओर ले जाता है। फिर शिक्षक मौलिक कुछ लाने की बजाय उपलब्ध ज्ञान से अपना आधार बढ़ाने में लगा रहता है। जिन भी स्कूल,कॉलेजों ने अच्छा प्रदर्शन किया है वह मौलिक होकर किया है, उपलब्धियों पर फोकस रखकर नहीं किया है। उन्होंने सोचा कि वे अपनी श्रेष्ठतम पद्धतियां कैसे निर्मित कर सकते हैं। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का शांति निकेतन इसका उदाहरण है। अपने समय में वहां मौलिक शिक्षण पद्धति अपनाई गई थी। प्राचीनकाल की मौलिकता के लिए भारत पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है। उसकी अपनी अलग एेतिहासिक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, भौगोलिक अन्य विविध क्षेत्रों में विशिष्ट विरासत है। हमें उसी आधार पर मौलिकता का विकास करना होगा। तभी नई शिक्षा नीति सार्थक होगी।

महिपाल चौधरी
राजस्थानविश्वविद्यालय, जयपुर
Facebook: Mahipal_choudhary
शिक्षा में अंधानुकरण ही करेंगे या मौलिकता भी लाएंगे

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