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समाज का नैतिक स्तर ऊंचा हो तभी महिला सुरक्षित होगी

पिछले दिनों ‘मी टू कैंपेन’ से समाज का एक कड़वा सच उजागर हुआ।

निकिता आनंद | Last Modified - Nov 14, 2017, 05:11 AM IST

समाज का नैतिक स्तर ऊंचा हो तभी महिला सुरक्षित होगी
पिछले दिनों ‘मी टू कैंपेन’ से समाज का एक कड़वा सच उजागर हुआ। इसमें शामिल अंदाज़न 47 लाख लड़कियों ने फेसबुक स्टेटस के माध्यम से अपने शारीरिक शोषण की आपबीती साझा करने की हिम्मत दिखाई कि कैसे किसी दोस्त, रिश्तेदार, सहपाठी, सहकर्मी, राह चलते अनजान व्यक्ति ने उनके साथ अवांछित और अभद्र व्यव्हार किया। अमेरिकी अभिनेत्री अलीसा मिलानों के इस कैंपेन से यह सिद्ध हुआ कि शोषण सिर्फ किताबों या कोर्ट-कचहरी की बात नहीं है बल्कि एक सर्वव्यापी समस्या है चाहे वो घर, स्कूल, कॉलेज, ऑफिस हो या फिर सार्वजनिक परिवहन जैसे की बस, ट्रेन या टैक्सी-कैब। जब पश्चिम के खुले और आधुनिक माहौल में महिलाओं की सुरक्षा का यह हाल है तो हम भारत में इसकी स्थिति की कल्पना ही कर सकते हैं।
इसके लिए बदलाव की शुरुआत घर से ही करनी होगी। माता -पिता के साथ ही घर में सीधे संवाद का माहौल रखे, ताकि कोई भी बेटी बिना डरे अपने साथ हुई गलत हरकत के या आसपास रह रहे अनैतिक व्यक्ति के बारे में घर के बड़ों को बता सके। स्कूल में छात्राओं को कंपल्सरी सेल्फ डिफेन्स क्लासेस में जुडो-कराते, बॉक्सिंग सिखाई जाए ताकि वे आपात स्थिति में खुद की सुरक्षा कर सके।
सरकार को सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे, पुलिस की नियमित गश्त, टैक्सी-कैब में कंटीन्यूअस जीपीएस मॉनिटरिंग आदि कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही मौजूदा कानून को अपराधी के खिलाफ और सख्त बनाना होगा। इसके अलावा ऑफिस अथवा काम की जगहों पर उत्पीड़न की शिकायतों का निष्पक्ष और न्यायोचित निवारण ज़रूरी है। महिलाओं को अपने साथ हो रहे शोषण के खिलाफ बेझिझक बोलना होगा। सिर्फ यही तरीका है इस सर्व व्यापी समस्या को ख़त्म करने का। दूसरा पहलू नैतिकता का है। राष्ट्र निर्माण में समाज के नैतिक स्तर को ऊंचा उठाना बहुत जरूरी है। समाज विज्ञानियों को इस विषय में चिंतन करना चाहिए कि यह किस प्रकार संभव है।
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