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ब्रिटेन से अलग होने की राह पर स्कॉटलैंड

7 वर्ष पहले
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.केविन रैफर्टी
गुरुवार को स्कॉटलैंड के 40 लाख लोग फैसला करेंगे कि इंग्लैंड के साथ 300 साल पुराना संबंध कायम रखें या उस खत्म कर दें। ऐसी रिपोर्टें हैं कि स्कॉटलैंड अलग होने का फैसला कर चुका है और अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या यह ब्रिटिश यूनियन के प्रतीक ध्वज का अंत होगा और क्या स्कॉटलैंड ब्रिटेन की महारानी और करेंसी ‘पाउंड’ को मान्यता देता रहेगा।

स्वतंत्र स्कॉटलैंड से न सिर्फ ब्रिटेन को बल्कि यूरोप व पूरे पश्चिमी जगत को क्या खतरा पैदा होगा इस पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। अलगाव की ओर बढ़ते स्कॉटलैंड ने ब्रिटिश श्रेष्ठि वर्ग की बौद्धिक क्षमता, राजनीतिक निष्ठा और निर्णय प्रक्रिया की अक्षमता को जरूर उजागर किया है। अलग होने के लिए जनमत संग्रह होना ही यह बताता है कि ब्रिटिश राजनीति मार्गरेट थैचर के दिनों की ओर लौट गई है, जब थैचर ने हर व्यक्ति पर समान कुख्यात पोल टैक्स लगा दिया था, फिर आमदनी चाहे जो भी क्यों न हो। तभी से स्कॉटलैंड में असंतोष खदबदाने लगा। अब अंतिम समय में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन स्कॉटिश लोगों को खैरात बांटकर रिश्वत देने की कोशिश कर रहे हैं, जो ब्रिटिश राजनेताओं की अक्षमता और इस मसले से निपटने की तैयारी के अभाव को दर्शाता है। जब तक शेयर सूचकांक व पाउंड नहीं गिरे तब तक नेता यही समझते थे कि स्कॉटलैंड ब्रिटेन में बना रहेगा।
जनमत संग्रह में ‘हां’ का बहुमत होते ही स्कॉटलैंड अलग हो जाएगा। फिर चाहे आधारभूत चीजें भी तय नहीं है कि करेंसी क्या होगी, शासक कौन होंगे, संविधान क्या होगा, स्कॉटलैंड यूरोपीय संघ का सदस्य होगा या नहीं। सवाल पैदा होता है कि जटिल संवैधानिक मुद्‌दे हल करने के लिए जनमत संग्रह कितना उचित है, इसलिए अलग होने पर मुहर लगने के बाद स्कॉटलैंड और ब्रिटेन के बीच समस्याएं खड़ी हो जाएंगी। स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर व स्कॉटिश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता एलेक्स सालमंड पाउंड को करेंसी बनाए रखने पर तुले हैं। वे अर्थशास्त्रियों की इस सलाह पर ध्यान नहीं दे रहे हैं कि अपनी करेंसी और केंद्रीय बैंक के बिना कोई देश आजाद नहीं माना जा सकता। उधर, बैंक ऑप इंग्लैंड के प्रमुख और राजनेताओं ने स्कॉटलैंड व ब्रिटेन की मुद्रा पाउंड बनाए रखने से इनकार कर दिया है।
झगड़ा नॉर्थ सी ऑइल के संसाधनों को लेकर खड़ा होगा, जो ज्यादातर स्कॉटलैंड में हैं। फिर सालमंड ब्रिटिश आणविक सुविधाएं हटाकर स्कॉटलैंड को परमाणु मुक्त देश बनाने पर तुले हैं। ब्रिटेन की 6.40 करोड़ आबादी में स्कॉटलैंड के लोग 53 लाख ही क्यों न हो पर राजनीति, बिज़नेस व वित्तीय क्षेत्र में स्कॉट नेतृत्व की जड़ें मजबूत हैं। पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर व गॉर्डन ब्राउन स्कॉट ही थे। यह रहस्य ही है कि ब्रिटेन व स्कॉटलैंड के बीच मुद्‌दा क्या है। भाषा का कोई झगड़ा नहीं है। स्कॉटलैंड की अपनी संसद है। स्वास्थ्य व शिक्षा के मसले पर पूरे अधिकार हैं। अब इसी राह पर वेल्स व उत्तरी आयरलैंड भी चलें तो वह ब्रिटेन, जहां कभी सूरज नहीं डूबता था, इंग्लैंड में सिमट कर रह जाएगा।
-लेखक प्लेन वर्ड्स मीडिया के एडिटर इन चीफ हैं।
plainwordsmediaeditor@yahoo.com