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नियमितता में है शांतिपूर्ण सफलता

7 वर्ष पहले
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आजकल माता-पिता के पास बच्चों की शिकायत सूची में यह भी है कि बच्चे आलसी होते जा रहे हैं, लेकिन गौर से देखा जाए तो आजकल के बच्चे बहुत क्रियाशील नजर आते हैं। खतरा उनकी अनियमितता से है। इसके कारण बच्चों का तेज और चुस्त दिमाग भी जल्दी थकने लगता है। नए जमाने में बाल मनोविज्ञान को इस बात से जोड़ दिया गया है कि तुम्हें हर हाल में और बहुत जल्दी सब प्राप्त करना है। देर की तो दूसरे आगे निकल जाएंगे। इस दबाव ने उनके मन को बेचैन अौर तन को अनियमित बना दिया है। इनके पास जीवन का अनुभव तो कम होता है, लेकिन अपेक्षाएं भरपूर होती हैं, इसलिए हमें बच्चों की अनियमितता पर बहुत काम करना चाहिए। यह आदत लंबे समय तक चली तो हम इन्हें वक्त से पहले बीमारियों का तोहफा दे देंगे। प्रतिस्पर्द्धा के दबाव में आलस्य तो चला जाएगा, लेकिन अनियमितता बढ़ती जाएगी। मनुष्य को अनियमित बनाता कौन है? आध्यात्मिक दृष्टि से देखेंगे तो हमें अनियमित बनाने में शरीर और मन का हाथ है। इंसान का शरीर अपने आप में जुलूस है। जैसे जुलूस में भीड़ अपने-अपने राग के साथ होती है, जिसे जो समझ में आ रहा है वह करता है, वैसे ही हमारे अंग हो गए हैं। तालमेल ही नहीं बैठ पाता। इसी तरह मन कहां से आ रहा है, कहां जाएगा, किसी को नहीं मालूम। शरीर के लिए खाना और सोना और मन के लिए योग तथा ध्यान, दो बातें करनी होंगी। अनियमितता से ही सफलता शांति के साथ आएगी।
पं. विजयशंकर मेहता
humarehanuman@gmail.com
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