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हर स्थिति को सहजता से स्वीकारें

7 वर्ष पहले
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हमारा सोचना और फिर प्रतिक्रिया करना, इस पर हमारी खुशी या परेशानी टिकी रहती है। कुछ घटनाओं पर आपका वश नहीं रहता, वे घटकर ही रहेंगी। गुरु नानकदेव की यह घोषणा बड़ी गजब की है कि आपका जो नजरिया है वैसी ही आपकी दुनिया बन जाएगी, इसलिए कुछ बातों को सहज रूप से स्वीकार करें, लेकिन हम स्थितियों से उलझने लगते हैं। हम हमेशा चाहते हैं कि हालात हमारे अनुकूल रहें। अध्यात्म कहता है कि हम बाहर की स्थिति से भीतर बिल्कुल विचलित न हों। हम बाहरी स्थितियों और व्यक्तियों को देखकर अपने भीतर के अस्तित्व को भी बदलने लगते हैं। किसी अनजाने के साथ व्यवहार करते हैं तो बहुत गंभीर, बोझिल हो जाते हैं। अहंकार ओढ़ लेते हैं। फिर कोई अपना मिल जाए तो पूरा रंग-ढंग बदल जाता है। किसी अमीर आदमी के सामने हों, तो विनम्रता अंग-अंग से टपकने लगती है और अधिकार सम्पन्न होते ही हमारा अहंकार टपकने लगता है। हम यह मुखौटे ओढ़ने का खेल बड़ी आसानी से खेल लेते हैं। बाहर की चीजें हमें भीतर से बदलती जाती हैं, जबकि थोड़ा गहराई में जाएं तो हम पाएंगे कि हमारी आत्मा को बाहर के हालात से कोई लेना-देना नहीं है। हमारी चेतना सदैव के लिए जाग्रत है और शांत है। बाहर जो भी हो रहा है, उससे हम भीतर डिस्टर्ब न हों। ऐसा तभी होगा जब हम अपनी आत्मा से जुड़ना सीख जाएंगे। इसके लिए चौबीस घंटे में कुछ समय एकांत में जरूर बिताएं। अपने से जुड़ जाएंगे तो दूसरे से जुड़ने का आनंद ही अलग होगा।
पं. विजयशंकर मेहता
humarehanuman@gmail.com
web:hamarehanuman.com