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बाधाएं दूर करनी हों तो एकांत साधिए

7 वर्ष पहले
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क्या हम यह जानते हैं कि हमारे पास आज जो कुछ भी है अमीरी या गरीबी, शिक्षा या निरक्षरता, सुख या दुख यह सब कहां से आया और कहां जाएगा? ज्यादातर लोग इससे परिचित नहीं हैं। वे तो सिर्फ भोग रहे हैं। न तो इसके मूल की फिक्र है और न ही इसके परिणाम की चिंता। थोड़ा विचार करिए, ऐसी बातें जब जीवन में आती हैं तो कोई न कोई जरूर इनकी शुरुआत का बिंदु होता है और कहीं न कहीं जाकर इन्हें समाप्त भी होना है। इन दोनों छोरों से हम जितना अधिक परिचय कर लेंगे, उतना ही इन्हें भोगते समय आनंद उठा पाएंगे। इन छोरों को ढूंढ़ने के लिए हमेें एकांत में जाना पड़ेगा। थोड़ी देर एकांत साधिए। एकांत बड़ी से बड़ी बाधा को दूर कर देता है। एकांत का अर्थ होता है मन का निष्क्रिय रहना, तन का रिलैक्स रहना, विचारों का रुक जाना और आपका स्वयं से जुड़ जाना, लेकिन देखा यह जाता है कि हम अपने ही एकांत से घबराने लगते हैं। एकांत से घबराना क्या होता है इसे समझना है तो पति-पत्नी के रिश्ते को देखिए। कुछ जोड़ों को यदि एकांत में छोड़ दिया जाए तो वे उसमें से भी अकेलापन पैदा कर लेते हैं। वे अभिनय करने में इतने दक्ष हो जाते हैं कि लोगों को लगता है कि क्या अद्‌भुत मेल-मिलाप है, लेकिन दोनों जानते हैं कि कैसे हमने अपने एकांत को छिन्न-भिन्न कर रखा है, इसीलिए इनके जीवन में सुख आए या दुख, दोनों ही समय परेशान रहते हैं। न सुख का आनंद उठा पाते हैं, न दुख दूर कर पाते हैं, इसलिए एकांत के माध्यम से स्थितियों के आरंभ और अंत को जरूर पकड़िए।
पं. विजयशंकर मेहता
humarehanuman@gmail.com
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