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रोज की गतिविधियों में नवीनता लाएं

7 वर्ष पहले
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इस दौर में बदलाव से जुड़े रहना ही बुद्धिमानी है। हमारी दिनचर्या में कुछ काम ढर्रे में बदल जाते हैं। इन कामों को हम क्यों कर रहे हैं, इसका कोई जवाब नहीं होता। ये काम धीरे-धीरे आदत बन जाते हैं, जो दो तरह की होती हैं। एक नुकसान पहुंचाती है और दूसरी वह जिसमें न लाभ है, न हानि। बस, करने के लिए किए जा रहे हैं। ऐसे में हमारी ऊर्जा भी अज्ञात दिशा में बहने लगती है। हमारे पास ऊर्जा का असीम भंडार है, लेकिन उसका सद्पयोग न करें, तो वह सीमित हो जाता है, इसलिए अपने दैनिक ढर्रे को बदलते रहिए। डाइनिंग टेबल पर अपना स्थान बदला जा सकता है। यदि खड़े होकर स्नान करते हैं, तो बैठकर कर लें। गतिविधियों के तरीके भी परिवर्तित करते रहें। हम पाएंगे कि इस बदलाव से हमारी ऊर्जा एक नया रूप ले लेती है। एक ही ढंग से काम करने से हमारी दृष्टि भी एक तरह से बंध जाती है। हम बायस्ड भी हो सकते हैं। इसका मतलब है अच्छी चीजों से दूर जाना, इसीलिए हम अनेक गतिविधियां करते हुए होश में नहीं रह पाते। जैसे भोजन करते समय हम भूल ही जाते हैं कि भोजन कर रहे हैं। इसके बाद क्या करना है उसके विचार चलते रहते हैं। भोजन मुंह में जाता रहता है, क्योंकि यह आदत का हिस्सा है। इसका अर्थ है हम एकाग्र नहीं हैं, लेकिन बंधे हुए हैं। हमारी ऊर्जा को यहीं से जंग लगना शुरू होता है, क्योंकि ऊर्जा के पास नया कुछ करने के लिए होता नहीं। ऊर्जा को होश में काम करने में मजा आता है, इसीलिए अपनी दैनिक गतिविधियों में फेरबदल करते रहें।
पं. विजयशंकर मेहता
humarehanuman@gmail.com
web:hamarehanuman.com