वह मैक्सिकन मछुआरा बड़ी मछली लेकर समुद्र से लौटा। अमेरिकी पर्यटक ने मछली देखकर उसकी गुणवत्ता पर मछुआरे को बधाई दी और पूछा कि मछली पकड़ने में उसे कितना समय लगा। मैक्सिकन ने जवाब दिया, ‘ज्यादा नहीं।’ अमेरिकी ने पूछा, ‘तो फिर तुमने और मछलियां क्यों नहीं पकड़ीं।’ मछुआरे ने जवाब दिया कि इतने से उसकी जरूरतें पूरी हो जाती हैं। अमेरिकी ने पूछा, ‘फिर बाकी के समय में तुम क्या करते हो?’ उसने जवाब दिया, ‘मैं देर तक सोता हूं। फिर थोड़ी मछलियां पकड़ता हूं। लौटकर बच्चों के साथ खेलता हूं। दोपहर बाद मैं पत्नी के साथ वक्त गुजारता हूं। शाम को दोस्तों के बीच थोड़ी शराब पीकर गिटार बजाते हुए कुछ गीत गा लेता हूं। फिर घर लौटकर भोजन कर सो जाता हूं। मैं भरी-पूरी जिंदगी गुजार रहा हूं।’ अमेरिकी ने कहा, ‘मैंने हार्वर्ड से एमबीए किया है। मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं। तुम ज्यादा मछलियां पकड़कर बड़ी नाव खरीद लेना। बड़ी नाव से आमदनी ज्यादा होगी। फिर धीरे-धीरे तुम ट्रालर्स का पूरा बेड़ा खरीद लेना। खुद ही प्लांट खोल लेना। गांव छोड़कर तुम न्यूयॉर्क चले जाना। वहां से अपना विशाल बिज़नेस चलाना।’ मछुआरे ने पूछा, ‘इसमें कितना वक्त लगेगा।’ ‘शायद बीस या पच्चीस साल।’ ‘उसके बाद?’ ‘जब बिज़नेस बहुत फैल जाएगा तो शेयर खरीद-बेचकर अरबों-खरबों कमा लेना।’ ‘अरबों-खरबों! वाकई? उसके बाद?’ ‘उसके बाद तुम काम छोड़ देना। समुद्र किनारे के सुंदर से गांव में रहने लगना। सुबह आराम से उठना, बच्चों के साथ खेलना, मनोरंजन के लिए थोड़ी-बहुत मछलियां पकड़ना। दोपहर बाद का वक्त पत्नी के साथ बिताना और अपनी शामें दोस्तों के साथ शराब पीने और गीत-संगीत में बिताना।’