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समय की रेत पर पैरों के निशान

7 वर्ष पहले
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मोहन को एक रात सपना आया कि वह ईश्वर के साथ समुद्र किनारे बीच पर चहलकदमी कर रहा है। उसने देखा कि आसमान सिनेमा के परदे की तरह हो गया है और उस पर उसे अपनी जिंदगी के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। हर दृश्य में रेत पर पैरों की दो जोड़ी के निशान दिखाई दे रहे थे। एक जोड़ी उसके और दूसरी जोड़ी ईश्वर के पैरों के निशान थे। उसकी जिंदगी के अच्छे-बुरे अवसरों के दृश्य गुजर रहे थे और हर दृश्य में पैरों की दो जोड़ियों की छाप उसे बता रही थी कि ईश्वर उसके साथ रहा है। देखते-देखते जब अंतिम दृश्य आया तो उसने मुड़कर देखा तो क्या देखता है कि कई दृश्य ऐसे थे जिनमें पैरों के निशानों की एक ही जोड़ी थी। दूसरी जोड़ी नदारद थी। फिर उसके यह भी ध्यान में आया कि ये उसके जीवन का वह समय था जब वह सबसे ज्यादा दुखी, सबसे ज्यादा उदास और सबसे अधिक कष्ट में था। ऐसा वक्त जब उसे किसी के सहारे की सबसे अधिक जरूरत थी। इससे वह बहुत विचलित हो गया। उसने ईश्वर से पूछा, ‘हे ईश्वर आपने कहा था कि एक बार कोई व्यक्ति मेरा अनुसरण करने का संकल्प ले लेता है तो मैं उसका साथ कभी नहीं छोड़ता। हमेशा साथ बना रहता हूं।’ ईश्वर ने स्वीकार में गर्दन हिलाई। राबर्ट ने कहा, ‘लेकिन मैंने देखा कि जब-जब मेरी जिंदगी का सबसे कठिन दौर रहा रेत पर पैरों की एक ही जोड़ी के निशान थे। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसे वक्त में आप मुझे क्यों छोड़कर चले गए थेे?’ ईश्वर मुस्कराए और बोले, ‘मेरे प्यारे बच्चे मैं तुम्हें चाहता हूं और तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ूंगा। कठिन समय में रेत पर तुम्हें एक जोड़ी पैरों के निशान इसलिए दिखे, क्यों तब मैं तुम्हें हाथों में उठाकर ले जा रहा था।’