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कल्पना करें, भरोसा रखें और जो पाना है उसे हासिल करें

छोटी सोच और पैर की मोच इंसान को आगे नहीं बढ़ने देती। हम जैसे सुझाव मन को देते हैं, वह उस पर तुरंत विश्वास कर लेता है।

Dainik Bhaskar

Mar 06, 2017, 06:47 AM IST
Bhaskar Editorial
छोटी सोच और पैर की मोच इंसान को आगे नहीं बढ़ने देती। हम जैसे सुझाव मन को देते हैं, वह उस पर तुरंत विश्वास कर लेता है। केवल जिद्‌दी आदमी ही इतिहास रच सकता है। आत्म-सुझाव, जिसे अंग्रेजी में ऑटो सजेशन कहते हैं, एक बहुत ही शक्तिशाली प्रणाली है, जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति कुछ भी हासिल कर सकता है।
जिंदगी चुनावों का परिणाम है, आप क्या और किसे चुनते हैं, यह तय करता है कि आप जिंदगी में कितनी दूर तक जाएंगे, क्योंकि शब्द और विचार आपस में जुड़े हुए हैं, तो जब भी हम कमजोर शब्दों का प्रयोग करते हैं, तो हमारे विचार भी कमजोर हो जाते हैं। इसी प्रकार जब हम मजबूत शब्दों का प्रयोग करते हैं, तो हमारे विचार मजबूत हो जाते हैं। वास्तविक जीवन में बड़ा काम करना उतना कठिन नहीं है, िजतना कि बड़ा सोचना। जिस दिन आप बड़ा सोचने लग गए, उसी दिन आप बड़ा काम करने योग्य हो जाते हैं। मनुष्य शरीर से नहीं, मन से विकलांग होता है। अगर आपका मन अपंग हो गया, तो आप हमेशा के लिए विकलांग जाएंगे। मन की शक्ति बड़े से बड़ा चमत्कार ला सकती है।
अपने जीवन से शकुनी और मंथरा जैसे व्यक्ति को निकाल दें, क्योंकि इन्हीं के कारण रामायण और महाभारत की दिशा खराब हो गई थी। आपके जीवन में आपका सलाहकार कौन है? क्या आप अपने जीवन में शकुनी जैसे लोगों से सलाह लेते हैं या फिर आप श्रीकृष्ण जैसे लोगों से सलाह लेते हैं। आपके जीवन का सलाहकार यह तय करेगा कि आप जीवन में किस दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। छोटी सोच और पैर की मोच इंसान को आगे नहीं जाने देती। हम जैसे सुझाव मन को देते हैं, वह उस पर तुरंत विश्वास कर लेता है। केवल जिद्‌दी आदमी ही इतिहास रच सकता है। जैसे जब महात्मा गांधी को ट्रेन के पहले दर्जे से धक्का देकर निकाल दिया गया तो उन्होंने उसी वक्त संकल्प लिया, अंग्रेजों तुमने मुझे आज ट्रेन से निकाला है..मैं तुम्हें अपने देश से निकाल दूंगा। ठीक उसी तरह आज हमें इतिहास को रटने की नहीं, रचने की जरूरत है। यह संकल्प क्या है? यह मन की बिखरी हुई शक्तियों को समेटकर एक पुंज में तब्दील करने की तरकीब है।
आत्म-सुझाव जिसे अंग्रेजी में ऑटो सजेशन कहते हैं, एक बहुत ही शक्तिशाली प्रणाली है, जिसके द्वारा एक व्यक्ति कुछ भी हासिल कर सकता है। इसे अंग्रेजी में कंसीव, बिलीव और अचीव कहा जाता है। यानी कल्पना करें, भरोसा रखें और हासिल करें। अगर अच्छे फ्रुट (फल) चाहिए तो अपने रूट्स (जड़ें) पहले ठीक करें। इंसान हमेशा एक ही गलती करता है कि वह जड़ों को मजबूत बनाए बिना अच्छे फल पाना चाहता है। हम अपनी जिंदगी को नहीं चलाते, पैटर्न हमारी जिंदगी को चलाते हैं। पैटर्न खराब हो जाते हैं तो जिंदगी गलत दिशा की ओर चल पड़ती है।

बिलीफ सिस्टम ही मानव जीवन में एक ऐसा ताकतवर तत्व है, जो इंसान को कुछ करने पर बाध्य कर सकता है। फिर काम चाहे अच्छा हो या बुरा। भारत के पूर्वोत्तर के इलाकों में महिलाएं भक्ति से प्रेरित होकर जलते अंगारों पर चल लेती हैं। ठीक उसी प्रकार आतंकी जेहाद के नाम पर निर्दोषों की जान ले लेते हैं। यह बिलीफ सिस्टम लोगों के अंदर गहरे छपे संस्कार होते हैं, जिसे अगर हम बदलने में कामयाब हो गए, तो क्रांति आ जाएगी।
विवेक बिंद्रा
लीडरशिप कंसल्टेंट, सीईओ कोच
info@vivekbindra.com
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