पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Bhaskar Editorial On Distance Between The Government And Opposition

फिर उजागर हुई सरकार और विपक्ष के बीच दूरी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में हुई बहस और उस पर प्रधानमंत्री के जवाब ने सरकार और विपक्ष के बीच मौजूद खाई के पाटे जाने की संभावनाओं पर पानी फेरा है। हालांकि, इस वक्त के सबसे विवादास्पद मुद्‌दे- भूमि अधिग्रहण बिल पर नरेंद्र मोदी ने सरकार के रुख में कुछ रियायत का संकेत दिया, मगर उन्होंने विपक्ष पर तीखे कटाक्ष किए, जिसके बाद संभावना कम है कि विपक्षी दल इस मामले में अपना रुख नरम करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार यूपीए के समय बनाए गए उचित मुआवजा और जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में पारदर्शिता कानून की खामियों को दूर करने का प्रयास कर रही है। उसके विधेयक में कोई कमी है तो वह सुधार करने को तैयार है। ऐसी पेशकश के बाद सामान्य अपेक्षा यही होती कि विपक्ष बिल को रोकने का प्रयास करने की बजाय आमसहमति बनाने के लिए आगे आए, लेकिन, जैसाकि अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भी जाहिर हुआ, विपक्षी दलों को इस मुद्‌दे पर सरकार को किसान और गरीब विरोधी बताने का मौका मिला है। संकेत यही है कि वे आसानी से इसे हाथ से नहीं जाने देंगे। अभिभाषण पर बहस के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार और प्रधानमंत्री की कार्यशैली पर निशाना साधा, तो उसके जवाब में मोदी सिर्फ अपने बचाव तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने विपक्ष- खासकर कांग्रेस पर व्यंग्यबाण दागे। बताया कि कैसे उनकी सरकार विकास को रफ्तार देने की कोशिश कर रही है, बीते नौ महीनों में भारतीय जनता पार्टी के चुनावी वादों को पूरा करने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं और किस तरह वह संविधान को अपना धर्म-ग्रंथ मानते हुए सभी समुदायों को साथ लेकर चलने के संकल्प पर अडिग है। मगर साथ ही उन्होंने मनरेगा की नाकामी, पूर्व सरकार के समय संघीय भावना की अनदेखी, कोयला खदान आवंटन में घोटाले आदि का जिक्र कर कांग्रेस को याद दिलाया कि आम चुनाव में वह क्यों 44 सीटों पर सिमट गई। जाहिर है अभिभाषण पर बहस के दौरान राजनेता सियासी मतभेदों से आगे नहीं झांक पाए। अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में भी संसद का नज़ारा नहीं बदलेगा। विधायी कार्य और संसदीय प्रक्रिया राजनीतिक दलों की रणनीति का शिकार बनते रहेंगे। दरअसल, राज्यों और स्थानीय स्वशासन संस्थाअों के स्तर तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के संकुचित दृष्टिकोण सुशासन में बाधक रहा है। दुर्भाग्य है कि अब केंद्रीय स्तर पर भी यही दिख रहा है।