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महिलाओं को बिज़नेस में लाना है तो मौके भी देने होंगे

यह अच्छी बात है कि उस सम्मेलन में 53 प्रतिशत महिलाएं हैं और विशेष अतिथि इवांका खुद भी उद्यमी हैं।

Bhaskar Editorial | Last Modified - Nov 30, 2017, 05:50 AM IST

हैदराबाद के वैश्विक उद्यमशीलता सम्मेलन (जीईएस) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप्म की बेटी और उनकी सलाहकार इवांका ने व्यवसाय में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान करके भारत में नए संदेश का संचार किया है। यह अच्छी बात है कि उस सम्मेलन में 53 प्रतिशत महिलाएं हैं और विशेष अतिथि इवांका खुद भी उद्यमी हैं। सम्मेलन का ध्येय वाक्य भी ‘महिलाएं प्रथम, सबको समृद्धि’ है। इवांका ने रेखांकित किया है कि उद्यम के क्षेत्र में महिलाओं के आगे आने से सिर्फ भारत की समृद्धि के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। प्रधानमंत्री ने इस सम्मेलन को सिलिकॉन वैली और हैदराबाद के बीच सेतु बताते हुए भारतीय मिथक का स्मरण दिलाया कि यहां दुर्गा शक्ति की प्रतीक रही हैं। इसके साथ यह भी देखने की जरूरत है कि भारत में उद्यमशीलता के लिए महिलाओं को किस हद तक सुरक्षा, शिक्षा और मौके दिए जा रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि इंदिरा नुयी, नैना लाल किदवई, किरण शा मजुमदार, चंदा कोचर, इंदू जैन और नीलम धवन जैसी महिलाएं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के शिखर पर हैं। व्यवसाय करने में बढ़ी सहूलियत के कारण महिलाएं भी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। उधर अमेरिका में निजी क्षेत्र में 30 प्रतिशत कंपनियों का स्वामित्व महिलाओं के हाथ में है और वैसे 46 प्रतिशत उद्योगों का 50 प्रतिशत शेयर भी स्त्रियों के पास है। 1.2 खरब डॉलर के राजस्व वाली इन कंपनियों ने तकरीबन दो करोड़ लोगों को रोजगार दे रखा है। इसके बावजूद 2008 की मंदी के साथ ही यह बात शिद्दत से महसूस की गई है कि व्यासायिक घरानों के बाहर की स्त्रियों के लिए पूंजी जुटा पाना कठिन है। वित्तीय संस्थाएं उन पर उतना भरोसा नहीं करतीं जितना पुरुषों पर। तमाम कंपनियों के बोर्ड रूम में आज भी पुरुषों का दबदबा है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में आज भी लैंगिक भेदभाव है। वह चाहे पदों के स्तर पर हो या वेतन के स्तर पर। उस कट्‌टरता पर भी लगाम लगनी चाहिए, जो कभी धर्म के नाम पर तो कभी आस्था के नाम पर महिलाओं की स्वाधीनता पर कुठाराघात करती है। यह सही है कि भारत में दुर्गा और लक्ष्मी जैसी देवियां पूजी जाती हैं लेकिन, आचरण उसके विपरीत होता है। आशाजनक है कि सम्मेलन की भावना स्त्रियों के आर्थिक सबलीकरण की दिशा में है उसी में मानवता का कल्याण भी है।
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Web Title: mahilaon ko biज़nes mein laanaa hai to mauke bhi dene hongae
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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