योजना बनाते रहने से घटती है जोखिम लेने की क्षमता

5 वर्ष पहले
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कोई बिज़नेस या काम करने का फैसला लेने और योजना बनाने के बाद अक्सर ऐसा लगता है कि अभी वक्त नहीं आया है, थोड़ा और पैसा इकट्‌ठा हो जाए, स्थिति थोड़ी और अनकूल हो जाए। ऐसी सोच व्यक्ति को कोई कदम उठाने से रोकती है। सिर्फ प्लानिंग करते रहने से व्यक्ति की जोखिम लेने की क्षमता कम होती जाती है। 
 
जब मैं अपनी जिं़दगी को मुड़कर देखता हूं, तो मैं ऐसे बहुत से प्लान देख सकता हूं, जो मैंने अपनी जिं़दगी में बनाए थे। मुझे हमेशा से योजनाएं बनाना बहुत पसंद था। लेकिन, जब मैं देखता कि वास्तव में कितने प्लान मैंने अमल में लाए तो अजीब  अहसास होता था। संभव है यह इतनी अजीब बात न भी हो। दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग होंगे, जो ऐसा ही करते होंगे। ऐसे कितने लोग होंगे, जो नए वर्ष पर कोई संकल्प लेते वक्त उसे अमल में लाने वाली योजनाएं भी तैयार रखते हों? 
 
सवाल यह है कि वह कौन-सी चीज है, जो हमें वह करने से रोकती है, जिसका हमने संकल्प लिया है? ऐसा क्यों होता है कि हुनर और रुझान होेने के बाद भी हम वे बहुत सारी चीजें हासिल करने में नाकाम रहते हैं, जो हम चाहते हैं? मेरे पास सरल-सा उत्तर यही है ‘एक्शन पैरालिसिस।’
 
ज्यादातर लोग इससे पीड़ित रहते हैं। जिसके कारण हम ‘लंबित’  या ‘इसे भूल जाएं’ की सूचियों में बहुत सारी चीजें  डालते चले जाते हैं! यह किसी भी अन्य प्रकार के पैरालिसिस यानी पंगुता से ज्यादा खराब स्थिति है, क्योंकि यह जानते हुए भी कि आप कर सकते हैं, आपके पास प्लान भी हो सकता है लेिकन, फिर भी आप कर कुछ भी नहीं कर पाते। सौभाग्य से अपनी ज़िंदगी में मैंने बहुत जल्दी इस खौफनाक बीमारी को पहचान लिया था। मैं आपको बताना चाहता हूं कि इसे ठीक करने के लिए बहुत प्रयासों की जरूरत होती है। एक्शन पैरालिसिस की दवाई के रूप में इच्छाशक्ति को लगाना सबसे जरूरी है।
 
अपनी ज़िंदगी में सबसे बड़े एक्शन पैरालिसिस का सामना मैंने अपना बिज़नेस शुरू करने के विचार और उसकी योजना बनाते वक्त किया था। मैं लंबे समय से योजना बना रहा था और हमेशा मुझे लगता कि अभी वक्त आया नहीं है। ‘कुछ और समय रुको, थोड़ा और पैसा इकट्‌ठा हो जाए, स्थिति कुछ और अनुकूल हो जाए,’ इस तरह के विचार वे कदम न उठाने के कारण थे, जिन्हें मुझे उठाने की जरूरत थी। इस तरह कुछ वर्षों तक बहानेबाजी करने के बाद मैंने खुद से कहा कि तुम प्लानिंग जरूरत से ज्यादा कर रहे हों और सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि समय के साथ तुम जोखिम लेने की क्षमता खो रहे हो। इस तरह अपनी इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ मैंने अंतत: डुबकी लगा दी। 

मैं यह तो नहीं कहूंगा कि पहले ही साल मुझे बहुत बड़ी सफलता मिल गई लेकिन, हर कदम के साथ मैं आगे बढ़ता गया और उस यात्रा के हर क्षण का लुत्फ उठाने लगा। हर कदम मुझे ऊंचाई पर ले गया और मेरी नींव मजबूत होती गई, जिससे मुझे उससे अधिक हासिल करने में मदद मिली, जितना में शुरुआती वर्षों में हासिल करने की अपेक्षा रख सकता था। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इतने वर्षों से जो मैं कर रहा हूं, उसे मैं बहुत पसंद करता हूं। यही वजह है कि मुझे स्टीव जॉब बहुत पसंद रहे हैं। उन्होंने ज़िंदगी के बारे में और जो आप करना पसंद करते हैं, उसके बारे में जो भी कहा है मैं उससे खुद को सहमत पाता हूं। जीवन बहुत छोटा है। अपने एक्शन पैरालिसिस का इलाज कीजिए और पहला कदम उठाइए।
 
अच्छी सोच- जुबिन राशिद, ऑथर और कॉर्पोरेट ट्रेनर
zr@zubinrashid.comcom
 
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