इन दिनों हम बच्चों की शिक्षा पर बहुत जोर दे रहे हैं, लेकिन सवाल उठता है कि क्या केवल शिक्षा से काम चल जाएगा? शिक्षा की एक बहन है शिष्टाचार। देखा जा रहा है कि अधिकांश बच्चे शिक्षा लेकर तो घर लौटते हैं पर दूसरी बहन शिष्टाचार घर में प्रवेश नहीं कर पाती। यही वजह है कि बच्चे घर में जिद, अमर्यादित व्यवहार या कभी-कभी बदतमीजी की हद पार कर जाते हैं। शिष्टाचार का प्रयास परिवार के भीतर से ही करना होगा। परिवार के वरिष्ठ सदस्य जो माता-पिता, बड़े भाई-बहन भी हो सकते हैं, सभी मिलकर संयुक्त रूप से कृतज्ञता और शिष्टाचार का मिला-जुला आचरण प्रस्तुत करें, तब बच्चों के जीवन में दोनों बहनें ठीक ढंग से आएंगी। छोटा-सा भी काम पूरा हो तो प्रशंसा अवश्य की जाए।
घर में जो भी सदस्य जो काम कर सकता हो, उससे वह जरूर कराया जाए। इससे वह सम्मानित महसूस करता है। दूसरों के प्रति शिष्ट होने में मन बड़ी बाधा पहुंचाता है। मन सक्रिय हो, भरा-पूरा हो तो कभी भी सही काम नहीं करेगा। अशांत रखेगा। मन निष्क्रिय हो या अनुपस्थित हो तो अच्छे काम होंगे। इन दोनों के बीच एक कोरा मन भी है। जिसे रखकर कृतज्ञ होना, शिष्ट होना बड़ा आसान है, इसलिए घर के सभी सदस्य पूजा-पाठ के साथ कुछ समय योग को जरूर दें।
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