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प्रेमपूर्ण होकर व्यसन से मुक्त कराएं

6 वर्ष पहले
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तंबाकू, धूम्रपान और मदिरा पान को अब दोषपूर्ण नहीं माना जाता। ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाते हैं पर चरित्र से इसका संबंध खारिज कर दिया गया है। मदिरा पान तो स्टेटस सिंबल बन गया है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि मदिरा घर में पहुंच गई है। जहां यह समस्या है, उन घरों के समझदार लोग नशे में शिकार व्यक्ति केे व्यक्तित्व की जड़ में जाकर देखें कि कमजोरी कहां है। आपको वह कमजोरी दूरी करनी होगी।
उसे अपनी उस जड़ पर लौटाकर लाना होगा, जहां नशे की जरूरत नहीं होती और इसके लिए एक अच्छा दोस्त बनना पड़ेगा। कुल-मिलाकर बुराई नशे की वृत्ति में है। मनुष्य मूल रूप से एक शुद्ध प्राणी है, नशा उसको अशुद्ध करता है, इसलिए उसकी शुद्धता जहां मूलरूप से बसी हुई है, उस जगह काम किया जाए और यह काम प्रेमपूर्ण होकर, विश्वसनीय बनकर दोस्त के रूप में ही किया जा सकता है।
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