पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

वर्तमान को उपयोगी बनाना ही पुरुषार्थ

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
समय के सदुपयोग की सलाह दी जाती है। जो लोग समय प्रबंधन में रुचि रखते हैं उन्हें इसके कई तरीके सिखाए जाते हैं। टाइम मैनेजमेंट पर अध्यात्म की अपनी दृष्टि है। हिंदू धर्म ने तो समय को काल और काल को देवत्व से जोड़ा है। समय को भविष्य, वर्तमान और भूतकाल में बांटा गया है। भविष्य का अज्ञात होना ही मनुष्य के परिश्रम को रोचक और गहरा बना देता है। इसी तरह भूतकाल का निचोड़ अनुभव होना चाहिए, न कि बेकार की स्मृतियां। इन दोनों के बीच में महत्वपूर्ण है वर्तमान। एक ही क्षण में वह भूत में होता है या उसका रूप भविष्य होता है। वर्तमान को उपयोगी बनाना ही पुरुषार्थ है। वर्तमान पर टिकने के लिए अध्यात्म ने कुछ साधन बताए हैं।
उन्हीं में से एक है मेडिटेशन। ध्यान की आदर्श स्थिति यह होती है कि आंख बंद करके सांस पर नियंत्रण करना। जब जो काम करें, डूबकर करें यह भी एक ध्यान है। प्रकृति से जुड़कर हम ऐसा आसानी से कर सकते हैं। गाय की आंख में आंख डालकर देखें, तो उसमें गजब की गहराई होती है। आपका ध्यान लग सकता है। श्वान के नेत्रों में आंख डालें तो समय के प्रति एक अजीब सी जागरूकता नजर आती है। ये दोनों ही प्रयोग आपको वर्तमान में टिकाने में सहायक हैं और यही समय का सही सदुपयोग होगा।
humarehanuman@gmail.com
web:hamarehanuman.com