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क्रिकेट का मक्का बना मरुस्थल

6 वर्ष पहले
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शनिवार से विश्वकप क्रिकेट शुरू हो रहा है। क्रिकेट के इस माहौल में शारजाह में हुए भारत-पाकिस्तान के बीच हुए मैच याद आते हैं। जहां अब्दुल बुखातिर ने मरुस्थल को क्रिकेट का मक्का बना दिया था।

इस हफ्ते के अंत में विश्वकप क्रिकेट का आगाज़ हो जाएगा। हमारा पहला ही मुकाबला हमारे चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ है। हमारे इस पड़ोसी के साथ क्रिकेट मुकाबले की बात करते ही शारजाह की याद आती है। संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह में बहुत अच्छा स्टेडियम है। यह हमारे वानखेड़े, चिन्नास्वामी या ईडन गार्डन जैसा लंबी विरासत वाला और बड़ा नहीं है, लेकिन मेरे जैसे क्रिकेटप्रेमियों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं था।

यह स्टेडियम कंस्ट्रक्शन से लेकर रीटेल तक फैले व्यावसायिक साम्राज्य के मालिक अब्दुल रहीम बुखातिर की कोशिशों का नतीजा है। क्रिकेट का उन्हें जुनून था। उनका सपना था कि मरुस्थल वाले इस देश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों का आकर्षक स्थल बना दिया जाए। उन्होंने भारत से सुनील गावसकर व माधव मंत्री तथा पाकिस्तान से आसिफ इकबाल को अपने प्रोजेक्ट में शामिल किया। मरुस्थल की रेत पर क्रिकेट ग्राउंड असंभव-सी बात थी।

भारतीय उपमहाद्वीप से टनों मिट्‌टी मंगवाई गई और घास को हरी बनाए रखने के लिए पानी देने की बेहतरीन व्यवस्था की गई। इसके साथ उन्होंने क्रिकेटर्स बेनीफिट फंड (सीबीएफएस) की स्थापना भी की ताकि पूर्व व मौजूदा क्रिकेटरों को उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित करने के साथ उनकी सहायता भी की जा सके। भारत-पाकिस्तान मैच में भारी भीड़ उमड़ती। मैं जहां एड मैनेजर था वह ‘खलीज टाइम्स’ मीडिया स्पॉन्सर होता। इसके प्रमुख खालिद अंसारी मेरे अच्छे मित्र थे।
हमें वीआईपी स्टैंड्स के अलावा स्टेडियम में अन्य जगहों पर कोटा मिलता। अग्रिम पंक्ति में अभिनेता शम्मी कपूर और उद्योगपति विजय माल्या जैसे मेहमान होते। यह वन-डे मैच होता पर चूंकि स्टेडियम में रात्रिकालीन रोशनी की व्यवस्था नहीं थी, हम दिनभर कड़ी धूप में बैठकर मैच देखते, लेकिन सुनील गावसरकर व इमरान खान जैसे क्रिकेटरों का खेल देखने को मिले तो धूप की किसे चिंता।

हम उस मैच में हाजिर थे जब एक गेंद बची थी और पाकिस्तान को पांच रन चाहिए थे। भारत की जीत तय थी। चेतन शर्मा ने आखिरी गेंद फेंकी और जावेद मियांदाद ने जबर्दस्त छक्का लगाकर मैच छीन लिया। मैदान छोटा होने से छक्का लगाना आसान था। हम उदास चेहरे लेकर स्टेडियम से बाहर आए। सौभाग्य से तब क्रिस गेल और डिविलियर्स जैसे खिलाड़ी तब नहीं थे वरना बाहर सड़कों पर दौड़ रही कारों पर गिरती।

कासिम नूरानी बुखारी के दांए हाथ थे। उन्होंने क्रिकेट को अपना जीवन समर्पित कर दिया था। क्रिकेट के उनके ज्ञान और संगठन कौशल ने मरुस्थल में क्रिकेट को शीर्ष पर पहुंचाया। बुखातिर ने उन्हें सीबीएफएस का अध्यक्ष बना दिया। उनके नेतृत्व में संयुक्त अरब अमीरात ने 1984 और 2003 के बीच 198 अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया।
लेखक ख्यात रंगकर्मी हैं।