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मूडीज को मोदी से उम्मीद

8 वर्ष पहले
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अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज कॉर्पोरेशन यूपीए सरकार के इस आकलन से सहमत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे बुरा दौर गुजर गया है। वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की तरह इस एजेंसी की इकाई- मूडीज एनालिटिक्स का भी आकलन है कि इस वर्ष आर्थिक वृद्धि दर में तेजी आएगी। हालांकि जहां उन दोनों की समझ अलग हो जाती है, वह इस संदर्भ का राजनीतिक पहलू है। चिदंबरम ने स्विट्जरलैंड के दावोस में वल्र्ड इकोनॉमिक फोरम में भाजपा की आर्थिक नीतियों को प्रतिगामी बताया, वहीं मूडीज की उम्मीदें भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से जुड़ी हैं। मूडीज ने कहा है कि जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक भाजपा को सबसे ज्यादा वोट और सीटें मिलने वाली हैं, जिससे उसे केंद्र में सरकार बनाने का मौका मिलेगा।

उसके मुताबिक मोदी के सामने गैर-हिंदू मतदाताओं को आकर्षित करने की चुनौती है और संभव है उन्हें अल्पमत सरकार बनाने में दिक्कत आए। किंतु गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड के कारण संकेत है कि वे ऐसी बाधाओं से उबर सकते हैं। इसके पहले रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एवं पुअर्स, अमेरिकी निवेशक बैंक गोल्डमैन सैक, कई विदेशी ब्रोकरेज और स्टॉक मार्केट कंपनियों के अलावा कई विदेशी अर्थशास्त्री भी नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने का अनुमान लगाते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था की संभावनाएं उज्ज्वल बता चुके हैं। अर्थव्यवस्था की सेहत सुधरे, इसके लिए स्थिर और मजबूत सरकार अनिवार्य शर्त है। हाल ही अर्थव्यवस्था संबंधी जोखिम घटे हैं और रघुराम राजन के नेतृत्व में भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक स्थिरता लाने के गंभीर प्रयास कर रहा है। इसके साथ ही केंद्र में स्थिर सरकार बने तो बेशक बाजार की उम्मीदें पूरी हो सकती हैं। मगर लाख टके का सवाल यही है कि क्या ऐसी सरकार बनेगी?

पूर्वानुमान लगाना कठिन है। यूपीए शासन के प्रति असंतोष के कारण भाजपा के लिए अनुकूल स्थितियां हैं। मगर अस्थिरता के कारक खत्म हो गए हैं, यह नहीं कहा जा सकता। अत: चुनाव नतीजे आने तक इंतजार करना होगा। अभी यही कहा जा सकता है कि अर्थव्यवस्था स्थिर हो रही है और आगे काफी कुछ उभरने वाली राजनीतिक सूरत पर निर्भर करता है।