दार्जीलिंग विवाद राजनीतिक कौशल से सुलझाना होगा / दार्जीलिंग विवाद राजनीतिक कौशल से सुलझाना होगा

हड़ताल ने चीन के संदर्भ में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र के बरक्स बड़ी चिंताएं भी खड़ी कर दी हैं।

Bhaskar Editorial

Sep 28, 2017, 07:15 AM IST
Darjeeling controversy will be resolved with political skills
गृहमंत्री राजनाथसिंह की वार्ता की अपील पर दार्जीलिंग के जनमुक्ति मोर्चा के नेता विमल गुरंग ने 106 दिनों की हड़ताल वापस तो ले ली है लेकिन, इस हड़ताल ने चीन के संदर्भ में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र के बरक्स बड़ी चिंताएं भी खड़ी कर दी हैं। ममता बनर्जी ने हड़ताल के पीछे आतंकियों और विदेशी ताकतों का हाथ होने का आरोप लगाया भी है। गृहमंत्री ने एक पखवाड़े के भीतर तितरफा वार्ता आयोजित करने का गृहसचिव को आदेश दे दिया है लेकिन, देखना है कि उसमें गुरंग को शामिल किए जाने पर ममता सरकार कितनी तैयार होगी। ममता चाहती हैं कि वार्ता में गोरखालैंड प्रादेशिक बोर्ड के प्रमुख विनय तमांग शामिल हों ताकि वे दार्जीलिंग के गोरखा समुदाय के भीतर अपने समर्थक नेता पैदा करके अलग राज्य की मांग को कमजोर कर सकें। जबकि भाजपा अलग राज्य भले दे पर यह जरूर चाहेगी कि दार्जीलिंग की पहाड़ी अशांत रहे ताकि वहां आधार बनाने की ममता की राजनीति लड़खड़ाती रहे। इसी सोच के कारण दार्जीलिंग के भाजपा सांसद एसएस अहलूवालिया ने विमल गुरंग के आंदोलन का समर्थन किया था। त्रिभाषा फार्मूले के तहत स्कूली स्तर पर बांग्ला भाषा को अनिवार्य किए जाने की ममता बनर्जी की घोषणा से आंदोलन भड़का और मुख्यमंत्री की कई बार की सफाई के बाद भी शांत नहीं हुआ। चीन के साथ हुए डोकलाम गतिरोध के दौरान ही इस संवेदनशील इलाके के हिंसक आंदोलन पर चीन की तरफ से भी टिप्पणी सुनने में आई थी। इस अशांति ने पर्यटन के सीजन को तो तबाह किया ही इंटरनेट, मोबाइल, परिवहन व्यापार को ठप करके घाटी को आदिम युग में ठेल दिया। उधर, इस दौरान हुई 11 लोगों की मौत पर जनमुक्ति मोर्चा प्रायश्चित जताने की बजाय उन्हें शहीद बताकर उन्हें वार्ता का श्रेय दे रहा है। हिंदुत्व की राजनीति से घिरी ममता ने भाषा की राजनीति बंगाली मतदाताओं को एकजुट करने के लिए की तो भाजपा ने अलगाववाद की पुरानी मांग को हवा देकर उसे कमजोर कर दिया। गोरखालैंड की मांग अस्सी के दशक से उठ रही है जब एक रिटाटर फौजी सुभाष घीसिंग ने ज्योति बसु की सरकार को हिला दिया था। माकपा ने स्वायत्त परिषद बनाकर उस मांग को कुछ समय के लिए ठंडा किया लेकिन, अब ममता बनर्जी को नए संदर्भों में उसे संभालने की चुनौती है।
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Darjeeling controversy will be resolved with political skills
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