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डाउनलोड करेंजातक कथाओं में इस कथा का उल्लेख है। एक ग्वाला प्रतिदिन अपनी गायों को चराने के लिए जंगल ले जाता था। उस झुंड में से एक गर्भवती गाय जंगल में ही छूट गई। अगले दिन जब ग्वाले ने उसे जंगल में खोजा, तो वह नहीं मिली। वास्तव में वह गाय एक शेरनी की मांद में रुक गई थी। शेरनी भी गर्भवती थी। दोनों साथ-साथ मित्रवत् रहने लगीं। कुछ दिनों बाद गाय ने बछड़े को और शेरनी ने शावक को जन्म दिया। बछड़ा और शावक साथ रहने के कारण मित्र बन गए। एक दिन किसी सैनिक ने शेर और बैल को साथ देखा।
उसने यह बात राजा को बताई। राजा ने कहा - ‘जब इनके साथ कोई तीसरा आ मिले, तब बताना।’ कुछ दिन बाद एक गीदड़ ने शेर और बैल से मित्रता की। राजा ने कहा - ‘यही तीसरा इन दोनों में फूट डालेगा और ये दोनों आपस में लड़कर मर जाएंगे।’ उधर गीदड़ ने सोचा कि मैंने सिंह और बैल के मांस को छोड़कर सभी जानवरों का मांस खाया है। अब इन दोनों को लड़वाकर मैं इनका मांस खाऊंगा। उसने दोनों को भड़काना शुरू किया। अंतत: बैल और शेर की लड़ाई हुई। दोनों मृत्यु को प्राप्त हुए। गीदड़ ने दोनों का मांस खाया और चलता बना।
राजा भी कुछ देर बाद वहां पहुंचा और अपने सैनिक से बोला - ‘चुगली करने वालों के वचन पर विश्वास करने से यही गति प्राप्त होती है।’ राजा के कहने पर सैनिक ने शेर के मूल्यवान चर्म, नख और दांतों को निकाल लिया। इस प्रतीकात्मक कथा का सार यह है कि किसी के कथन पर बिना प्रमाण विश्वास कर लेना घातक होता है। अत: जब भी कोई किसी के विषय में कुछ कहे, तो पहले उसकी प्रामाणिकता परखें।
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