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नाम की तरह सीटी बजाकर एक-दूसरे को बुलाती हैं डॉल्फिन

9 वर्ष पहले
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डॉल्फिन तेज सीटी बजाकर एक-दूसरे को अपनी मौजूदगी का अहसास कराती हैं। यह एक तरह से उनके नाम की तरह हो सकता है। यह कहना है ब्रिटेन के सेंट एंड्रूज यूनिवर्सिटी के मरीन बायोलॉजिस्ट स्टीफेनी किंग का। डॉल्फिन बेहतरीन तरह से आवाज की नकल करने में सक्षम होती हैं।
वह कंप्यूटर से निकाली गई आवाज की भी नकल कर सकती हैं। इसलिए वैज्ञानिक अब इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि डॉल्फिन एक-दूसरे के सिग्नेचर विसिल की नकल कर सकती हैं। सैकड़ों विसिल के रिकॉर्ड का विश्लेषण कर वैज्ञानिक अब इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि डॉल्फिन सीटी के रूप में एक-दूसरे का नाम रखती हैं।
कई सारे जानवरों में एक-दूसरे का नाम रखने की योग्यता को सीखने की क्षमता नहीं होती है। बंदर खाने के लिए और दुश्मनों के आक्रमण करने पर ही आवाज करते हैं। मगर, ये गुण बंदरों ने सीखा नहीं होता है, बल्कि ये उनमें जन्मजात होता है। इस नए अध्ययन ने नाम रखने के महत्व को समझने के दरवाजे खोल दिए हैं।
वैज्ञानिकों ने पाया कि डॉल्फिन ने नामों की जैसे सीटी बजाना करीब ५क् साल पहले शुरू किया। तब से शोधकर्ताओं ने पाया कि डॉल्फिन का बच्चा अपनी मां से विसिल बजाना सीखता है। स्टीफेनी का कहना है कि डॉल्फिन की आवाज को पहचानना आसान नहीं होता। वे अक्सर पानी के अंदर संदिग्ध परिस्थितियों में आवाज निकालती हैं।
ऐसे में वैज्ञानिकों के लिए यह पहचान करना मुश्किल होता है कि कौन-सा जानवर आवाज निकाल रहा है। इस समस्या को हल करने के लिए स्टीफेनी और उनके सहकर्मियों ने डॉल्फिन के सिग्नेचर विसिल की पानी के अंदर की गई रिकॉर्डिग का विश्लेषण किया। 1984 से 2009 के बीच फ्लोरिडा के सारासोटा बे में 250 डॉल्फिन की आवाजों की ये रिकॉर्डिग सारासोटा डॉल्फिन रिसर्च प्रोग्राम के वैज्ञानिकों ने की थी। स्टीफेनी ने विसिल बजाते समय डॉल्फिन के व्यवहार को समझने के लिए पकड़ी गईं चार डॉल्फिन का विस्तृत अध्ययन भी किया।
news.sciencemag.org