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परिवार को प्रेम, स्नेह से जोड़ें

8 वर्ष पहले
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भारत में जब भी परिवार की बात आती है, संयुक्त परिवार और एकल परिवार की चर्चा जरूर होती है। मेरा लगभग रोज ही कुछ ऐसे लोगों से मिलना होता है, जो या तो संयुक्त परिवार के सदस्य हैं, या सिंगल यूनिट के मेंबर हैं। दोनों ही अपनी-अपनी स्थिति के खुशी या गम मुझे बताते हैं। अब समय आ गया है कि हम किसी एक में सुख की घोषणा नहीं कर सकते।

एक छत के नीचे 10 से 15 लोग रहें और घुटन महसूस करें तो फिर बेकार है। और एक छत के नीचे उसी घुटन के कारण बाहर निकलकर 2-4 लोग रहें, जैसा कि आज-कल रह रहे हैं और फिर भी प्रेमपूर्ण न हों, तो किस मतलब का। हर परिवार में एक सुख छुपा है और हर सुख में दु:ख छुपा है। इसलिए दोष संख्या को न दिया जाए। कारण ढूंढ़ा जाए रहन-सहन के तरीके में।

परिवारों में रहते हुए सुख-दु:ख के इतने खतरे नहीं हैं, जितने खतरे हैं प्रेम के अभाव के और ईष्र्या की मौजूदगी के। सुख-दु:ख के खतरे उतने नहीं हैं, जितना संकट उदासी का है। अधिक लोग हों, या कम लोग। परिवार में उदासी बिलकुल न आने दें। उदासी मिटाने का सरल तरीका है कि एक-दूसरे में प्रेमपूर्ण रुचि लें।

यदि आप बड़े हों तो आपका प्रत्येक व्यवहार स्नेहपूर्ण रहना चाहिए और यदि छोटे हों तो हर गतिविधि में आदर का भाव बनाए रखें। आपके द्वारा ली जा रही रुचि दूसरों में ऊर्जा भरे इसका ध्यान रखिए। उसे हस्तक्षेप न बना लें। घर में लीडर बनने की कोशिश बिलकुल न की जाए, बल्कि हर व्यक्ति महत्वपूर्ण है इस भाव को लगातार जगाया जाए।