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लेखन: चित्रों से की-बोर्ड तक सफर

5 वर्ष पहले
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लिफाफे की पीठ पर किराने के सामान की सूची तो आपने पहले कभी बनाई होगी, यदि शिक्षक हैं तो बोर्ड पर लिखने के अलावा बच्चे की कॉपी में रिमार्क भी किए होंगे। दफ्तर की मीटिंग में हम नोट्स बनाते ही हैं। याद कीजिए कि पिछली बार आपने कागज-पेन लेकर लंबा-सा पत्र कब लिखा था? लिखना कब टाइपिंग में बदल गया और टाइपिंग कब स्टाइलस से किसी स्क्रीन पर तब्दील हो गई हमें पता नहीं चला। अब जब लैपटॉप पर नोट्स लिए जा रहे हैं, तो कर्सिव राइटिंग तो कब की विदा हो गई। यह सिर्फ लेखन का इतिहास है, लेकिन इनोवेशन अब भी जारी हैं।

चार हजार वर्ष ईसा पूर्व मेसोपोटामिया में पहली बार लेखन का आविष्कार हुआ था। ईसा से 1000 साल पहले सुमेर सभ्यता ने मिट्‌टी की गिली पट्‌टियों पर सरकंडे से लिखा। पट्‌टी को टेबलेट और सरकंडे को स्टाइलस कहा गया। 1000 वर्ष बाद चीन में कागज का आविष्कार हुआ। माना जाता है कि बौद्ध भिक्षुक ही भारत से कागज बनाने की तकनीक ले गए। फिर चित्रोें वाली लिपि पिक्टोग्राम, ‘जीवन’ जैसी चीजों को व्यक्त करने वाले आइडियोग्राफ बने।
चित्र पहले संकेत बने। फिर वर्ण बने और अक्षर का निर्माण होकर लेखन कला पूर्ण हो गई। सरकंडे का स्टाइलस 1940 के आते-आते बॉल पॉइंट पेन बन गया। इसके पहले ही 1808 में टाइप राइटर का आविष्कार होने के साथ लेखन और की-बोर्ड का संघर्ष शुरू हो गया।

अब पेन और की-बोर्ड बिल्कुल भिन्न माध्यम हो गए। वर्ड प्रोसेसिंग लिखने का अाम जरिया हो गया। कोडेक्स मैन्यूस्क्रिप्ट में आप पेज ले-आउट बदल सकते थे और फॉन्ट की शैली भी, लेकिन सॉफ्टवेयर ने जो पहले से न देखा हो ऐसा किसी शैली का आप आविष्कार नहीं कर सकते। कागज ने बहुत गुंजाइश बढ़ा दी। दोनों तरफ लिख सकते थे। मार्जिन छोड़ सकते थे। एक और फर्क था।
इलेक्ट्रॉ़निक ढंग से लिखा टैक्स्ट, हाथ से लिखे टैक्स्ट की तरह विशिष्ट छाप नहीं छोड़ता। कंप्यूटर पर आप चाहे जितना टैक्स्ट बदल लें, लेकिन आपके द्वारा किए फेरबदल का कोई रिकॉर्ड नहीं होता। सॉफ्टवेयर कहीं न कहीं तो इसका रिकॉर्ड रखता है, लेकिन वहां तक यूज़र की पहुंच नहीं होती। जो की-बोर्ड हैंडराइटिंग को रिप्लेस करने वाला लगता था आज उसे इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर के रूप में लेखन से चुनौती मिलने लगी।

आज आईपेन्सिल, स्टाइलस के साथ-साथ ऐसे एप भी आ गए हैं, जो लेखनी के तरीके बदल रहे हैं। उनसे राइटिंग का न केवल अनुभव नया है, बल्कि वह नया ट्रेंड भी स्थापित कर रहे हैं। कई कंपनियां आज भी स्मार्ट राइटिंग को और अधिक बेहतर बनाने में जुटी हैं, यानी लेखन का जो कार्य हजारों साल पहले शुरू हुआ था। उसमें आज भी सुधार किया जा रहा है। यही नहीं, लेखनी से कहीं अधिक अब भाषाओं वाले की-बोर्ड आ गए हैं, जो यूजर का काम न केवल आसान बना रहे हैं, बल्कि कहीं-कहीं तो उसे चुनिंदा शब्द भी तैयार मिल रहे हैं।
इसी के साथ अब वॉइस टू टैक्स्ट भी शुरू हो गया है, जिसमें लिखने की भी जरूरत नहीं। जो बोला जाता है, वही स्क्रीन पर टाइप हो जाता है। कई बार उच्चारण सही न होने पर यह तकनीक सही काम नहीं कर पाती है। एपल ने अपने आईपैड-प्रो के लिए स्टाइलस न बनाते हुए, आईपेन्सिल बनाई है, जो यूजर को कई तरह से लिखने एवं ड्रॉइंग करने के विकल्प देगी।
हालांकि सैमसंग अपना स्टाइलस पहले ही ले आया था, लेकिन उसने उसकी कार्य करने की क्षमता में और अधिक सुधार कर दिया है। इन्हें देखकर कंपनियों ने एेसे एप बनाने शुरू कर दिए हैं, जिनमें पेन्सिल या स्टाइलस की भी जरूरत नहीं। हाथ से लिखने पर वे लेखनी एेसी बना देते हैं, जो सुंदर दिखाई देती है।
लिखावट में इनका कब्जा
एमएस ऑफिस : 1983 में यह लॉन्च हुआ। ज्यादा ऑप्शन्स नहीं थे, लेकिन वर्तमान में करीब 97 प्रतिशत कम्प्यूटरों पर इसी का कब्जा है। इसमें 6 से अधिक सॉफ्टवेयर हैं, जिनमें से चार का उपयोग ज्यादा होता है।
एमएस वर्ड : दुनियभर में लिखने से संबंधित अधिकतर कार्य इसी पर किए जाते हैं।
एमएस एक्सेल : संख्या आधारित कार्य एवं शीट तैयार करने में इसका उपयोग होता है।
एमएस पावर पाइंट : प्रजेन्टेशन संबंधित कार्य के लिए यह सबसे अच्छा माना गया है।
एमएस वन नोट : यह राइटिंग, ड्रॉइंग और स्क्रीन क्लीपिंग आसान बनाता है। स्टूडेंट ज्यादा उपयोग करते हैं।
गूगल डॉक्स
किसी भी डॉक्यूमेंट को ऑनलाइन एडिट करने के लिए 2007 में इसे लॉन्च किया गया। अब यह 53 भाषाओं में उपलब्ध है, वर्ड राइटिंग के अलावा इसमें शीट एवं प्रजेन्टेशन बनाए जा सकते हैं।
एडोबी
यह सॉफ्टवेयर फैमिली है, जिसने राइटिंग, पीडीएफ से लेकर ई-सिग्नेचर, स्कैनिंग, फोटो राइटिंग, जैसे ग्राफिक डिज़ाइन की सुविधाएं दी। इसके सॉफ्टवेयर हमारा काम आसान बना रहे हैं।
एपल पेजेस
यह भी वर्ड प्रोसेसर है, जो एपल के आईओएस पर ही काम करता है। इसमें 140 से ज्यादा डिज़ाइन टेम्पलेट उपलब्ध हैं, जो डिजिटल राइटिंग को आसान बनाती हैं। इसमें अभी और सुधार जारी हैं।
आगे की स्लाइड्स में देखें वो इनोवेशन, जिनसे स्मार्ट बनी लेखनी और लिखावट...
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