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खुशी बाहर नहीं, आपके भीतर है

7 वर्ष पहले
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खुशी को लेकर आजकल बहुत काम होता है। खुशी हासिल करने के वर्कशॉप तक लगाए जाते हैं। सभी चाहते हैं खुशी मिल जाए। ऋषि-मुनियों ने कहा है कि खुशी बाहरी स्थिति नहीं है, मानसिक अवस्था है। हमारी सोच की दिशा खुशी में बदल जाती है। खुशी को बाहर से अर्जित नहीं करना है। इसकी तैयारी भीतर से होती है। टंकी में पानी डाला जाता है और कुएं में जमीन से आता है। भोग-विलास टंकी में डाला गया पानी है। खुशी कुएं में फूटी झरन है। खुशी को हमारे भीतर यदि कोई रोकता है तो वे हैं हमारी वासनाएं। भीतर सक्रिय वासनाएं जहां से खुशी आती है, उसी जगह लेपन करती हैं। आप बाहर कितने ही अच्छे काम कर लीजिए, लेकिन भीतर से खुश रहने के लिए तैयार नहीं हैं तो अच्छे से अच्छा काम भी मशीनी हो जाएगाा और यदि हम भीतर से तैयार हैं, तो फिर जो भी काम करेंगे वह अनूठा होगा।
अपनी खुशी दूसरों में ढूंढ़ने वाले लोग लंबे समय इस यात्रा को नहीं कर पाएंगे। संसार में रहते हैं, तो दूसरों के बिना जीवन कट भी नहीं सकता, संबंध निभाने भी पड़ेंगे। कई बार कुछ रिलेशन तकलीफ भी देते हैं। आपकी खुशी को खा जाते हैं, लेकिन यदि आपने आप भीतर से क्या हैं, इसे जानने की तैयारी कर ली तो खुशी आपकी मुट्‌ठी में है। फिर कोई भी संबंध इससे छेड़छाड़ नहीं कर सकता। हम खुशी बाहर ढूूंढ़ेंगे और यदि प्राप्त भी करेंगे तो या तो वह उसकी छाया होगी या अस्थायी रूप। व्यक्ति या परिस्थिति हटी तो खुशी भी गई, इसलिए खुशी अपने भीतर ढूंढ़ लें।
-पं. विजयशंकर मेहता | humarehanuman@gmail.com
web:hamarehanuman.com