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मनीला में नई भूमिका की तलाश करता भारत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से वार्ता के साथ भारत की नई भूमिका की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

Dainik Bhaskar

Nov 14, 2017, 05:00 AM IST
India seeks new role in Manila
आसियान देशों के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी और उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से वार्ता के साथ भारत की नई भूमिका की संभावनाएं बढ़ गई हैं। यह महज संयोग नहीं है कि ट्रम्प ने इस क्षेत्र का वर्णन करने के लिए एशिया-पैसिफिक के बजाय इंडो-पैसिफिक शब्द का इस्तेमाल करके अपने मित्रों और प्रतिद्वंद्वियों सभी को चौंका दिया है। देखना यह है कि चीन के मुकाबले अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान की यह चतुर्भुजी एकता इस इलाके और दुनिया के लिए नए शक्ति संतुलन का निर्माण कैसे करती है। एक तरफ ये चारों देश यह देख रहे हैं कि चीन की वन बेल्ट वन रोड परियोजना किस हद तक व्यापारिक घाटे को दूर करती हुई परवान चढ़ती है और आसियान देशों को अपनी तरफ आकर्षित करती है तो दूसरी तरफ आसियान की सफलता के लिए नए सिरे से तैयारी भी हो रही है। भारत 2005 से ही आसियान देशों की बैठक में हिस्सा लेता रहा है लेकिन, न तो वह वाणिज्यिक मोर्चे पर कोई पहल करता देखा गया और न ही रक्षा संबंधी मोर्चे पर। भारत की बैठक में औपचारिक भागीदारी ही रही है। उधर चीन ने अपने प्रभाव से कंबोडिया जैसे अमेरिकी खेमे के देश को पाला बदलने को मजबूर कर दिया तो फिलीपींस और थाईलैंड को तटस्थ कर दिया। ऐसे में अमेरिका इस इलाके में चीन से रिश्ता रखते हुए भारत को नई भूमिका के लिए प्रेरित कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस भूमिका के लिए उत्साहित हैं। इसी के मद्‌देनजर उन्होंने आसियान देशों के सभी राष्ट्राध्यक्षों को भारत के गणतंत्र दिवस पर दिल्ली आने के लिए आमंत्रित किया है। अगर अमेरिका भारत के लिए कोई बड़ी भूमिका निर्धारित करना चाहता है तो उस दिशा में स्पष्ट बातचीत होनी चाहिए। अस्पष्ट बातचीत और संकेतों में भारत को कुछ लाभ होने की बजाय सिर्फ चीन से तनातनी का ही सामना करना होगा। ट्रम्प की नीतियां अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों के मुकाबले लोचा देने वाली हैं, क्योंकि जिस वैश्वीकरण से इस इलाके में समृद्धि आनी है उसी नीति का अमेरिका विरोध कर रहा है। जलवायु परिवर्तन के मोर्चे पर भी कदम पीछे खींचे हैं। इन स्थितियों में कई बार चीन ज्यादा जिम्मेदार दिखने लगता है। मोदी को ट्रम्प से इन तमाम मसलों पर खुलकर बात करनी होगी।
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