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देह के साथ संयम रखेंगे तो प्रदर्शन से बचेंगे

बहुत कमलोग ऐसे हैं, जो अकेले में अपनी देह के साथ मनुष्य जैसा व्यवहार करते हों।

पं विजयशंकर मेहता | Last Modified - Nov 11, 2017, 07:25 AM IST

देह के साथ संयम रखेंगे तो प्रदर्शन से बचेंगे
बहुत कमलोग ऐसे हैं, जो अकेले में अपनी देह के साथ मनुष्य जैसा व्यवहार करते हों। चाहे खान-पान का हो या भोग विलास, अकेले में मनुष्य अधिकांश मौकों पर जानवर जैसा हो जाता है। भोग-विलास में संयम रखना तो बड़े-बड़ों के बस की बात नहीं रही। एकांत में जिसने देह के साथ मनुष्य जैसा व्यवहार किया, वे समझ जाएंगे तप क्या होता है, एकांत की दिव्यता क्या होती है शरीर का सदुपयोग क्या होता है? कई बार हम एकांत में अपने शरीर के साथ ऐसा कर चुके होते हैं कि याद आने पर शर्मिंदगी महसूस होती है। यदि एकांत में मनुष्य देह को संयमित कर मनुष्य जैसा आचरण किया तो इसका लाभ आपके व्यावसायिक, सार्वजनिक जीवन में भी मिलेगा। वरना जब हम छुप-छुपकर बिना लोगों की जानकारी के देह के साथ जो खिलवाड़ कर चुके हैं उसी देह की हमारी आदत हो जाती है और हम सबके सामने जो भी काम करते हैं उसमें शरीर को प्राथमिक रखते हैं। इसीलिए कोई भी काम कर रहे हों, इरादा होता है लोग मुझे पहचानें, मुझे ख्याति मिले। लोग तो शरीर को लाइट हाउस बना देते हैं। जैसे जहाज को उतरने के लिए प्रकाश स्तंभ की आवश्यकता होती है, बस ऐसे ही लोगों ने शरीर को ऐसा इस्तेमाल किया कि सब हमें देखें, हमारा प्रदर्शन हो। यहां से अहंकार जन्म लेता है। अकेले में अपनी देह को मनुष्य समझें, फिर सबके सामने प्रदर्शन से बचेंगे। काम तो अपना ही कर रहे होंगे लेकिन, नाम और ख्याति की भावना नहीं आएगी।
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