Hindi News »Abhivyakti »Jeene Ki Rah» Jeene Ki Raah By Pandit Vijay Shankar Mehta

सफलता मिलने पर अहंकार नहीं करें

करना तो सब हमें ही है लेकिन, करा कोई और रहा है।

पं विजयशंकर मेहता | Last Modified - Nov 14, 2017, 05:12 AM IST

सफलता मिलने पर अहंकार नहीं करें
करना तो सब हमें ही है लेकिन, करा कोई और रहा है। वो ‘और’ ऐसी परमशक्ति है जिसे सभी धर्मों ने अपने-अपने हिसाब से नाम दिया है। जिस दिन ये समझ और भाव हमारे भीतर उतर आता है, उस दिन से हम सारे काम करते हुए भी शांत रह सकते हैं। हमारी जिंदगी ऊपर वाले की लिखी पटकथा है। इसे भाग्य से न जोड़ें। पटकथा लिखने के बाद भी अभिनेता को अभिनय में हुनर दिखाना होता है। बहुत सारी चीजें पटकथा को सफल बनाती हैं। यह हमें अंगद समझा रहे हैं। जैसे ही तय हुआ कि वे श्रीराम के दूत बनकर रावण के पास जाएंगे, अंगद ने रामजी को प्रणाम करते हुए टिप्पणी की कि जिस पर आप कृपा कर दें, वह गुणों का सागर हो जाता है। अपने ऊपर किसी परमशक्ति को मानते हुए काम करना भी एक गुण है। यहां तुलसीदासजी ने लिखा,‘स्वयंसिद्ध सब काज नाथ मोहि आदरु दियउ। अस बिचारी जुबराज तन पुलकित हरषित हियउ।। स्वामी के सब काम अपने आप सिद्ध हैं। यह तो प्रभु ने मुझे आदर दिया है। ऐसा विचार कर अंगद का हृदय और शरीर पुलकित हो गया। ऊपर वाले के पास इतनी ताकत है कि वह सारे काम कर सकता है लेकिन, कराता हमसे है। हमें लगने लगता है हमने किया। हम तो निमित्त हैं, किसी भी घटना और स्थिति के कारणभर हैं। यह भाव जागने के बाद हमें आलसी नहीं होना है और न ही भाग्य पर टिकना है, बल्कि यह मानना है कि सारे काम हम करेंगे। परिणाम यदि सफलता के रूप में आया तो अहंकार नहीं करेंगे, असफल रहे तो उदास नहीं होंगे।
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Jeene Ki Rah

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×