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शांति पाना है तो मन में चलते विचार समझें

​समझदार होया नासमझ, विचारों का तूफान हर एक के भीतर एक जैसा चलता है।

Dainik Bhaskar

Nov 17, 2017, 05:05 AM IST
jeene ki raah by pandit vijay shankar mehta
समझदार होया नासमझ, विचारों का तूफान हर एक के भीतर एक जैसा चलता है। विचारों के धक्के से कोई नहीं बच सका है। फर्क यह है कि समझदार आदमी विचारों को व्यवस्थित कर लेता है और आने वाले विचारों के आगे-पीछे के अर्थ को पकड़ लेता है। इसी को समझदारी कहते हैं। नामसमझ को भीतर के विचार पकड़ में नहीं आते तो वह और ज्यादा परेशान हो जाता है। कुछ विचार तो ऐसे होते हैं कि आपको उनका स्पष्ट अर्थ समझ में जाएगा और उसे पकड़ सकेंगे। लेकिन, अधिकांश विचार घालमेल वाले होते हैं। चित्रकारी में एक शब्द है- कोलाज़। खाने-पीने की प्लेट में सलाद, कोई रंगोली या बूटिक प्रिंट को समझिए। विचार लगभग ऐसे ही होते हैं। सबकुछ मिला-जुला है। रंग समझ में रहा है चित्र। डिज़ाइन होने के बाद भी डिज़ाइन समझ में नहीं आती। लेकिन, समझदार आदमी बारीकी से देख लेता है। इसी को जीवन की गहराई कहते हैं। गहरे लोग विचारों के दांए-बांए, आगे-पीछे क्या है, इसको पकड़ लेंगे। विचार बिल्कुल ऐसे होते हैं जैसे नाम है तो बदनामी भी है। यश के पीछे अपयश है, कामयाबी के साथ नाकामयाबी जुड़ी है, सुख-दुख, जीवन-मृत्यु अलग नहीं है। माता के साथ पिता खड़ा है, पिता के साथ मां है। रात-दिन, सुबह-शाम ये सब कहने को विपरीत हैं पर क्रम में हैं। बस, सारे विचार ऐसे ही विपरीत लेकर क्रम अनुसार हमारे मस्तिष्क में बहते रहते हैं लेकिन, समझदार आदमी इनको ठीक से पकड़ लेता है। नासमझ इनके साथ बहता है और उसी बहाव का नाम अशांति है। जीवन में शांति पाने की इच्छा हो तो मन में चलते विचारों पर काम जरूर करते रहिए।
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jeene ki raah by pandit vijay shankar mehta
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