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ऊर्जा बचाने, प्रेमपूर्ण होने की साधना है मौन

थकान औरविवाद इस समय ये दोनों ही बातें गलत जगह पर होने लगी हैं। कई लोग जरा-सी मेहनत करते हैं और थक जाते हैं।

पं विजयशंकर मेहता | Last Modified - Nov 30, 2017, 05:44 AM IST

ऊर्जा बचाने, प्रेमपूर्ण होने की साधना है मौन
थकान औरविवाद इस समय ये दोनों ही बातें गलत जगह पर होने लगी हैं। कई लोग जरा-सी मेहनत करते हैं और थक जाते हैं। जो खूब परिश्रम करते हैं वो थकते तो देर से हैं पर गलत जगह थक जाते हैं। जैसे कोई घर आकर तब थकता है, जब बाकी सदस्य उसके साथ होते हैं। दिनभर खूब मेहनत की और जिनके लिए की उनके सामने आकर थक गए। ऐसे ही हाल विवाद के हैं। हम उस जगह विवाद करते हैं जहां प्रेमपूर्ण रहना चाहिए। और जहां विरोध करना चाहिए वहां बचते हैं। मनोवैज्ञानिक कहते हैं थकान और विवाद जिन-जिन बातों से जुड़े हैं उनमें से एक है बोलना। शब्द और वाणी का परिणाम बोलना कहा जा सकता है। यदि आप बोलते समय सावधान नहीं हैं और शब्दों को शरीर से निकालने में बेहिसाब हैं तो थकेंगे भी और विवाद में भी पड़ेंगे। अब सवाल यह उठता हैं कि शब्दों को संतुलित कैसे किया जाए? ज्यादातर लोग जानते हैं कि चाहते हुए कुछ ऐसा बोलने में जाता है, जो विवाद का कारण बन जाता है। कई लोग तो यह जानते ही नहीं कि शब्द हमारी बहुत ऊर्जा खा जाते हैं। इसीलिए हम तब थक जाते हैं जब नहीं थकना चाहिए। शब्दों को इसलिए बचाइए कि उनका परिणाम दूसरी जगह दे सकें या ले सकें और अनावश्यक विवाद से भी बचे रहें। इसका एक तरीका है मौन। जब तक मौन नहीं साधेंगे, आप सिर्फ शब्दों का वहन करेंगे। जिन्होंने थोड़ी देर भी मौन साध लिया, वो शब्द से ऊर्जा भी बचा लेंगे और विवाद से बचे रहने के कारण और प्रेमपूर्ण हो जाएंगे।
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Web Title: oorjaa bchaane, prempurn hone ki saadhnaa hai maun
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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