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मित्रों को आकर्षित करती है सहजता

7 वर्ष पहले
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हमारे बीच कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनके बहुत सारे मित्र होते हैं। इसका सतही कारण यह बताया जाता है कि जो लोग बहिर्मुखी होते हैं, वाचाल होते हैं, समीकरण बैठाने में कुशल होते हैं, उनके मित्रों का दायरा बड़ा होता है। किंतु यह ऊपरी तथ्य है। दोस्ती निभाने के लिए माली बनना पड़ता है।

माली अपने पेड़-पौधों से त्याग, सहयोग, समय, विश्वास और करुणा से पेश आता है। उन्हीं लोगों के दोस्त अधिक होते हैं, जिनमें ये पांच बातें होती हैं। आजकल कामकाज के संबंध होते हैं। वक्त गुजारने की यारियां बन जाती हैं, लेकिन दिल से दिल की दोस्ती कम नजर आती है। आज जिनके साथ हम घंटों उठते-बैठते हैं, फिर भी हम उनकी बात पर विश्वास नहीं करते।

हर बातचीत के नीचे अविश्वास की लहर चलती रहती है। हालांकि, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनकी हर बात पर लोग विश्वास कर लेते हैं। इसमें बहुत दिनों तक पाखंड नहीं चलता। आपकी वाक् शैली कुछ समय तो लोगों को प्रभावित कर देगी, लेकिन लंबे समय तक यह अभिनय नहीं चल पाएगा।

यदि हम चाहते हैं कि लोग हम पर भरोसा करें, हमारे भी बड़ी संख्या में अच्छे मित्र हों, तो भीतर से सहज, साधारण बनकर रहने का अभ्यास बढ़ाएं। आप बाहर से कितने ही असाधारण हों, प्रतिष्ठित हों, प्रभावशाली हों, लेकिन भीतर से एकदम सहज रहें। मन हमें असहज बनाता है, जिसकी तीव्र इच्छा है कि हम असाधारण हो जाएं। साधारण बनने के लिए भीतर एक विचार स्थायी रूप से रोप दें और वह है हम कुछ भी नहीं हैं, सिर्फ उस परमात्मा का अंश हैं।

पं. विजयशंकर मेहता- humarehanuman@gmail.com

web:hamarehanuman.com