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डाउनलोड करेंइस बात को कभी अपने भीतर स्थायी रूप से मत उतरने दीजिए कि हम सब जानते हैं। यह गलतफहमी सफलता की आपकी यात्रा को बाधित कर देगी। आपसे मिलने वाला छोटा या बड़ा व्यक्ति भी आपको कुछ अनमोल सीख दे सकता है पर हम लेने की तैयारी में नहीं होते। ध्यान रखिए, जिनके प्रति हमें श्रद्धा का भाव न हो उनसे भी कुछ सीखा जा सकता है। कभी-कभी हम मान लेते हैं कि हम उन्हीं से सीख हासिल करेंगे जिनके प्रति हमारे भीतर श्रद्धा-भक्ति होगी। दिल खुला रखें तो जिनसे हमें नफरत है, वे भी बहुत बड़ी सीख दे जाएंगे। जब भी हम किसी से कुछ सीखना चाहें तो तीन बातें करते रहें। एक तो उस व्यक्ति का अध्ययन करें, दूसरा उससे स्वयं की तुलना करें और तीसरा उसकी अच्छाई और बुराई में खुद को फ्रेम करें, फिर जो हमारे लायक है वो उठा लें। जब भी हम सीखने के दौर से गुजरते हैं हमारे भीतर एक रासायनिक प्रक्रिया शुरू हो जाती है। उससे हमारे व्यक्तित्व में भराव आ जाता है। यह भराव होता है ज्ञान का।
भीतर 'हमें सब आता है' यह घोषणा भरी हो तो अच्छी सीख बंद दरवाजे से टकराकर लौट जाती है। अध्यात्म में जब ध्यान की बात की जाती है, तो उसका यह मतलब नहीं होता कि भगवान को पाने के लिए ही मेडिटेशन किया जाए। ध्यान आपको भीतर से खाली करता है। यह खालीपन इतना पवित्र होता है कि इससे अच्छी बातें स्वीकार करने की क्षमता बढ़ जाती है। रात को या प्रात:काल किया हुआ ध्यान दिनभर आपके भीतर उस स्थान को खाली रखता है जहां श्रेष्ठ बातें प्रवेश कर सकती हैं।
पं. विजयशंकर मेहता- humarehanuman@gmail.com
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