हम किसी भी उम्र के व्यक्ति हों, जब भी कोई काम करें तो उसमें सीखने की वृत्ति जरूर रखें। यह वृत्ति यदि हमारे भीतर बनी रहे, तो हर काम में से हम उस जानकारी को निकाल लेंगे, जो हमें नहीं थी। कुदरत ने हर वस्तु में नवीनता छिपा रखी है, पर ढूंढ़ने वाला चाहिए। इस रहस्य को पाने की चाह में लोग दार्शनिक बन गए, भक्त हो गए, वैज्ञानिक और कलाकार बन गए। सीखने की वृत्ति रखने के साथ, जो सीखा है उसे तराशकर सुझाव में बदलें। आज भी लोगों को सुझाव की बहुत जरूरत है। लोग इतनी जल्दी में हैं कि खुद कोई होमवर्क करना नहीं चाहते। फिर टेक्नोलॉजी ने तो और सिखा दिया कि काम जल्दी हो जाए, दिमाग कम लड़ाना पड़े। ऐसे में लोगोंं को सही सुझाव की बहुत जरूरत है।
सलाह और सुझाव में यही अंतर है। सलाह बाल्टी को रस्सी से बांधकर कुंए में से पानी निकालने जैसी है। इसमें परिश्रम व दूरी है जबकि सुझाव बाल्टी लेकर थोड़ा पानी में उतरना, भीगना और फिर बाहर आना है। सुझाव देने वाला व्यक्ति सलाह को अपना चुका होता है। आप सही वक्त पर किसी को सही सुझाव दे दें तो जीवनभर आपको नहीं भूलेगा। आप महसूस करेंगे कि कुछ दुकानदार जब आपको सामान बेचते हैं, तो सामान की खूबी के अलावा उपयोग का सुझाव भी देते हैं, जो सामान्य से हटकर होता है। आपकी कल्पना में यदि वो बात न हो, यदि वह सुझाव में आ जाए और उपयोगी साबित हो, तब आपके सीखने का अर्थ बदल जाता है, इसलिए लगातार सीखिए और सीखे हुए को सुझाव बनाइए।
पं. विजयशंकर मेहता | humarehanuman@gmail.com
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