हम अपने अतीत से जुड़े रहते हैं, क्योंकि हम गुजरे समय के साक्षी थे। उस बारे में हमें बहुत कुछ मालूम है। तटस्थ रहकर सोचेंगे तो यह भी पता लग जाएगा कि आप थे क्या। ‘थे’ से ‘हैं’ तक की यात्रा, अतीत से वर्तमान तक की यात्रा है। क्या हैं इस पर भी हमारा चिंतन चलता रहता है। अभी मैं क्या कर रहा हूं, आज मुझे क्या करना चाहिए, ऐसे अनेक सवाल हम चौबीसों घंटे अपनी छाती पर लटकाए घूमते रहते हैं। दिनभर में इस पर थोड़ा समय जरूर गुजारिए कि आने वाले वक्त में आप क्या होंगे, क्योंकि जो आप थे वो अब आप हैं नहीं। जो अब आप हैं वैसे आप रहेंगे नहीं, इसलिए भविष्य में हम क्या बन सकते हैं इसकी तैयारी जरूर रखिए और बदलते वक्त से उसे जोड़ते चलें।
जैसे यदि हम उनमें से हैं जो अभी जवान हैं तो अपने को भविष्य से जोड़़ने का मतलब है पच्चीस-तीस साल बाद जब हम बूढ़े होंगे तब हमारा भविष्य क्या होगा। आने वाले वक्त में बूढ़े होने का मतलब खूब अकेले होना। पचास साल पहले के वृद्ध ने इतना अकेलापन नहीं भोगा था, जितना आने वाले वक्त के बुढ़ापे को उठाना होगा, इसलिए जीवन की हर घटना में अपना भविष्य जरूर देखें और जो भी योजना बनाएं वह भविष्य की दृष्टि से बनाएं। चाहे आपका व्यवसाय हो, परिवार का मामला हो या निजी जीवन के निर्णय हों। हर समय भविष्य व्यवस्थित तैयारी मांगता है। जो लोग बिना तैयारी के भविष्य में कूदेंगे, वे जरूर लड़खड़ाकर गिरेंगे। भविष्य सज-धजकर आने वालों का स्वागत करता है।
पं. विजयशंकर मेहता | humarehanuman@gmail.com
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