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ऊंचे विचारों से आते हैं प्रभावी शब्द

7 वर्ष पहले
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विचार हमारे आस-पास के वातावरण के प्रभाव का क्रिएशन होते हैं। देखने-सुनने से ही विचार बनने का सिलसिला शुरू हो जाता है। व्यस्त आदमी यह भूल ही जाता है कि क्या सोचा जा रहा है, किन बातों का समावेश मस्तिष्क में किया जा रहा है। जब पारिवारिक, सामाजिक एवं व्यावसायिक जीवन में वार्तालाप किया जाता है तब ये विचार ही शब्द बनकर बाहर आते हैं। बुद्धि इसमें अपनी भूमिका निभाती है। महत्वपूर्ण यह नहीं कि आपमें बुद्धि कितनी है, बल्कि अहम यह है कि आपके पास जो है आप उसका किस तरह उपयोग करते हैं। आपकी बुद्धि को दिशा देने वाले चिंतन या नजरिये का है। गौर करें कि जब हम खाली बैठे हों या किसी से वार्तालाप कर रहे हों, तब हमारे भीतर कौन सी बातें इकट्‌ठी हो रही हैं। बातें महत्वपूर्ण होंगी, तो बाहर भी प्रभावी शब्दों का विसर्जन होगा।
समय-समय पर अपना अंत:निरीक्षण करते रहें। मस्तिष्क में चल रहे तथ्यों का मूल्यांकन करें। नकारात्मक विचार निठल्ला बना देते हैं। ज्ञान ही शक्ति है, यह बात पूरी तरह सही नहीं है। ज्ञान शक्ति तभी बनता है, जब उसका उपयोग सही तरीके से किया जाता है। जब ऐसा लगे कि हमारे भीतर चल रहा विचारों का सैलाब किसी के लिए हितकारी नहीं है, व्यर्थ चिंतन है, तब विचारशून्य हो जाएं और उस परमशक्ति का स्मरण करें। उसका स्मरण हुआ और आपके विचार प्रभावी ढंग से समावेशित भी होंगे और सही ढंग से शब्दों का विसर्जन भी होगा, इसलिए सदैव विचार और शब्द के प्रति सावधान रहें।
पं. विजयशंकर मेहता | humarehanuman@gmail.com
web:hamarehanuman.com