न्यूयॉर्क के किसी स्कूल की शिक्षिका ने कक्षा के प्रत्येक बच्चे को बुलाया, उसे बताया कि उसका कक्षा में कितना महत्व है और उसे एक नीला फीता भेंट किया, जिस पर सुनहरे अक्षरों में लिखा था, ‘मैं क्या हूं, इससे फर्क पड़ता है।’ फिर उसने बच्चों को अतिरिक्त फीता देकर किसी को सम्मानित करने को कहा। एक बच्चा उठकर पड़ोस में मौजूद कंपनी में गया और एक जूनियर एग्ज़ीक्यूटिव की बांह पर वह फीता लगाकर कहा, ‘धन्यवाद आपने मुझे कॅरिअर के लिए एक दिन मार्गदर्शन दिया था।’ फिर उसने उन्हें भी फीता देकर कहा,‘ आप चाहें तो किसी को सम्मानित कर सकते हैं।’ दोपहर को वह जूनियर एग्ज़ीक्यूटिव अपने बॉस के पास गया, जो बड़े गुस्सैल व चिड़चिड़े व्यक्ति थे। उसने कहा, ‘आप क्रिएटिव जीनियस हैं। मैं आपका सम्मान करना चाहता हूं। क्या आप यह फीता आपकी बांह पर लगाने की अनुमति देंगे।’ बॉस को जरा आश्चर्य हुआ पर उन्होंने अनुमति दी।
फीता लगवाकर उन्हें बहुत अच्छा लगा। फिर एग्ज़ीक्यूटिव ने उन्हें एक फीता देकर कहा कि वे भी किसी को सम्मानित करें। रात को घर लौटकर वे बेटे के कमरे में गए और उसे सारी बात बताकर कहा, ‘मुझे तुम्हारा ख्याल आया। अपनी व्यस्तता के बीच मैं तुम्हारी ओर ध्यान नहीं दे पाता। स्कूल में अच्छी ग्रेड न लाने के कारण, कमरा गंदा रखने के लिए डांटता रहता हूं पर मेरे बेटे मैं तुम्हें बहुत चाहता हूं। तुम और तुम्हारी मां मेरी जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण हैं।’ यह सुनकर बेटा रोने लगा और रोते-रोते बोला, ‘मैं आत्म-हत्या के बारे में सोच रहा था, क्योंकि मुझे लगता था आप मुझे नहीं चाहते।’ अगले दिन बॉस ऑफिस में लौटें तो बदले हुए इंसान थे। अब वे यह कोशिश करते कि ऑफिस के हर बंदे को यह अहसास हो कि ऑफिस में उसका कितना महत्व है।