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डाउनलोड करेंएक शब्द ने 2014 के वर्ष को आकार देना शुरू कर दिया है। इसमें चकित और मनोरंजन करने के साथ नुकसान पहुंचाने की अनगिनत आशंकाएं हैं। यह शब्द है रोबोट। यह तो रोबोट वर्ष ही साबित हो रहा है। यदि आप अकाउंटेंट, रियल इस्टेट एजेंट या खुदरा दुकान पर काम करते हैं तो सावधान हो जाइए।
गूगल ने नेस्ट लैब को खरीदकर सुर्खियां बटोरीं। स्मार्ट थर्मोस्टेट और स्मोक डिटेक्टर बनाने वाली यह कंपनी पहले से मौजूद रोबोट बनाने वाली कंपनियों की सेना में शामिल हो गई है। इनमें बोस्टन डायनामिक्स भी है, जिसे पिछले साल खरीदा गया था।
गूगल भी बिना ड्राइवर की कार बनाने में लगी है। इसका दावा है कि ड्राइवरलेस प्रायस और लेक्सस कारों के इसके बेड़े से मिले आंकड़े बताते हैं कि ये प्रशिक्षित पेशेवर ड्राइवरों से भी ज्यादा सुरक्षित कारें हैं। ड्राइवरलेस कार के समर्थक कहते हैं कि रोबोट मानव की तुलना में ज्यादा तेजी से प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं और इनके सेंसर भी मानव से बेहतर होते हैं। ड्राइवर के सिर के पीछे रोबोट की तरह आंखें नहीं होतीं!
हाल में हुए लास वेगास कंज्य़ूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो में ऐसे ढेरों रोबोट बताए गए थे, जो आपकी खिड़कियां साफ कर सकते हैं, बच्चों को पढ़ा सकते हैं, आपका मनोरंजन कर सकते हैं या आपको कंपनी दे सकते हैं। शो का सितारा थेस्पियन नाम का एक ह्यूमोनॉइड रोबोट था। यह हाथों के इशारों के साथ अंग्रेजी में भाषण देता था। हालांकि इस रोबोट युग में अभिनेताओं को अभी तो खतरे में पड़ी प्रजाति नहीं कहा जा सकता।
इनकैप्स्यूला के मुताबिक रोबोट की तादाद में ऐसी वृद्धि हुई है कि पिछले साल 61 फीसदी वेब ट्रैफिक रोबोट द्वारा पैदा किया था जबकि मानव का योगदान सिर्फ 38.5 फीसदी ही था जबकि 2012 में उनका योगदान 49 फीसदी था। यह अच्छी खबर होने के साथ बुरी खबर भी हो सकती है।
अच्छे रोबोट में सर्च इंजन शामिल हैं, जो 31 फीसदी वेब-ट्रैफिक के लिए जिम्मेदार हैं। बुरे रोबोट्स में स्क्रेपर्स, हैकिंग टूल, स्पैमर्स और बहुरूपिये शामिल हैं। हालांकि अब स्पैमर्स और हैकर्स में कमी आई है पर अन्य बहुरूपिये तेजी से बढ़ रहे हैं। इनकैप्स्यूला चेतावनी देती है कि इन सबमें समान तथ्य यह है कि ये सारे किसी और की पहचान को अपनाने का प्रयास कर रहे हैं। उदाहरण के लिए कुछ रोबोट खुद को सर्च इंजन रोबोट या अन्य वैध एजेंसियों के एजेंट के रूप में पेश करते हैं। मकसद हमेशा एक ही रहता है- वेबसाइट की सुरक्षा में सेंध लगाना। यहां बहुत से आपस में जुड़े हुए सवाल हैं, जिनमें से कुछ विचलित करने वाले हैं।
एक सवाल तो यही है कि रोबोट क्या-क्या कर सकेंगे। कुछ रोबोट विशेषज्ञों का दावा है कि 2030 तक या इसके ठीक बाद रोबोट घर का सारा काम करने लगेंगे। वाहन चलाएंगे। इंटरनेट पर दिए ऑर्डर पर घर तक सामान पहुंचाएंगे, इसलिए दुकानों पर जाने की जरूरत नहीं रहेगी और डिलीवरी वैन को ड्रोन विमानों की मदद मिलेगी। इसकी प्रारंभिक शुरुआत तो आपको आज देखने को मिल सकती है। आई-रोबोट ने रूंबा बनाया है जो वैक्यूम क्लीनिंग कर सकता है तो स्कूबा फर्श को धो-पोंछ सकता है। कंपनी घर में काम करने लायक अन्य रोबोट पर काम कर रही है, जो वायरलैस के जरिये हैड बटलर से जुड़े होंगे, जिसे कोई मानव चला रहा होगा। जापानी वैज्ञानिक बूढ़े और बीमार लोगों की देखभाल करने में सक्षम रोबोट बनाने में लगे हैं। रोबोट की क्षमता में यकीन रखने वालों का कहना है कि आज के रोबोट कुछ साल पहले के मोबाइल फोन जैसे हैं, जो तब ईंट के आकार के और बहुत महंगे होते थे। मगर जल्दी ही हर घर में अपना रोबोट होगा। जरूरी नहीं है कि आज हम जैसा सोच रहे हैं, वे वैसे ही नजर आएं या वे हमारे जैसे होंगे, क्योंकि रोबोट में हमारे जैसे अकुशल फीचर्स क्यों होने चाहिए, जिसमें कमजोर शरीर भी शामिल हैं?
एक अन्य चिंता इस क्षेत्र में किसी एक कंपनी या बड़े कॉर्पोरेशन का प्रभुत्व होने की है। गूगल ने हाल ही नेस्ट और बोस्टन डायनामिक्स को खरीदा है। उससे पहले पिछले कुछ माह में वह सात नई कंपनियों को खरीद चुकी है। इन सारी कंपनियों के पास हाथों, भुजाओं और गतिविधियों से जुड़े अच्छे सिस्टम हैं। बेहतर विजन प्रोसेसर हैं। गूगल ने जब बोस्टर डायनामिक्स को खरीदा तो सुर्खी बनी थी, 'रोबोट्स आ रहे हैं और मालिक है गूगल।' बेशक गूगल को भी स्पद्र्धा का सामना करना पड़ेगा, जिसकी अपनी भयावह आशंकाएं हैं। जब अमेजन ने ड्रोन के जरिये डिलीवरी करने की योजना जाहिर की तो ब्लॉग्स पर लतीफों की बाढ़ आ गई। यह भी कहा गया कि अमेजन का वॉलमार्ट के साथ ड्रोन युद्ध शुरू होगा। वह अमेजन के ड्रोन की डिलीवरी में देर करने के लिए अपने ड्रोन भेजेगी। यह भी कहा गया कि बहुत सारे ड्रोन के कारण आसमान काला हो जाएगा। उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा तो छोड़ो, आधुनिक टेक्नोलॉजी के मुताबिक कानून ढालने में सरकारों की विफलता भी चिंता का कारण है।
अंत में दुनिया के कामगारों के लिए सबसे विचलित करने वाला सवाल, क्या रोबोट काम की जगहों पर मानव की जगह ले लेंगे? परंपरागत जवाब तो यही है कि नई टेक्नोलॉजी काम का तनाव दूर कर देगी और मानव ज्यादा कुशलता से काम कर सकेगा। 19वीं सदी में टैक्सटाइल मशीनों को तोडऩे वाले ल्यूडाइट नामक ब्रिटिश बुनकरों को याद कीजिए, वे गलत साबित हुए और मशीनों के कारण वाकई नई नौकरियां आईं, संपन्नता बढ़ी, किंतु रोबोट इतनी तेजी से और इतने सारे क्षेत्रों में आ रहे हैं कि कामगारों के लिए चिंता की बात तो है।
अमेरिका के पूर्व वित्तमंत्री लारेंस समर्स ने 25 से 54 वर्ष आयु के अमेरिकियों में रोजगार पर गौर किया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि 1960 के दशक में 20 लोगों में केवल एक व्यक्ति बेरोजगार होता था, लेकिन अब सोच-विचारकर किया जा रहा तकनीकी बदलाव वर्कर का विकल्प खोजने का रूप ले रहा है। इसका नतीजा यह हो सकता है कि अब से दस साल बाद हर सात व्यक्तियों में से एक बेरोजगार हो। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मार्टिन स्कूल के कार्ल फ्रे और माइकल ओसबोर्न का आकलन है कि टेली मार्केटिंग में लगे लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है।
लगभग पूरी संभावना है कि बड़ी डाटा और स्मार्ट मशीनें विकसित होने के साथ वे उनका स्थान ले लेंगी। यदि 1 का अंक रोजगार जाने की निश्चितता बताता हो तो अकाउंटेंट और ऑडिटर (0.94), रियल सेल्स स्टाफ (0.92), रियल एस्टेट एजेंट (0.86) को खबरदार हो जाना चाहिए जबकि पायलट (0.55) और अर्थशास्त्री (0.43) के लिए चिंता का कारण है। फिलहाल तो केवल रिक्रिएशनल थैरेपिस्ट (0.003), डेंटिस्ट (0.004) और धर्म गुरु, पंडे, पुरोहित, पादरी ही सुपरसेफ कहे जा सकते हैं।
केविन रैफर्टी, प्लेनवर्ड्स मीडिया के एडिटर इन चीफ
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